सहारनपुर। यदि आप सहारनपुर रेलवे स्टेशन या घंटाघर से अपने घर या रिश्तेदार के पास जाने के लिए ऑटो या ई-रिक्शा में सफर करते हैं तो पहले अपनी जेब में हाथ डाल लिजिए। क्योंकि रात होते ही यहां पर ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमानी भरा किराया वसूलते हैं। जहां दिन में 20 या 30 रुपये लगते हैं वहां पर 200 रुपये तक किराया वसूला जाता है। अमर उजाला टीम ने रेलवे स्टेशन और घंटाघर पर खड़े होने वाले ऑटो और ई-रिक्शा के किराये को लेकर मंगलवार रात 11 से 12 बजे तक पड़ताल की।
टीम सबसे पहले रेलवे स्टेशन के बाहर शिव हनुमान शनिदेव मंदिर के पास पहुंची। एक ऑटो चालक से बेहट अड्डे पर जाने के लिए किराया पूछा तो उसने एक सवारी के 100 रुपये और पांच सवारी है तो 150 रुपये लगेंगे, जबकि दिन में यहां का किराया मात्र 20 रुपये हैं। इससे कुछ ही दूरी पर खड़ी ई-रिक्शा चालक से चुनहेटी के लिए किराया पूछा तो उसने 100 रुपये बताया। कुछ ही पलों में एक व्यक्ति वहां आया और उसने कहा कि चुनहेटी के 200 रुपये लगेंगे। टीम मंदिर से रेलवे के साइकिल स्टैंड की तरफ बढ़ी और वहां खड़े ऑटो चालक से देहरादून चौक जाने का किराया पता किया। उसने बताया कि दो सवारी है तो 60 रुपये लगेंगे और एक के 50 रुपये किराया लगेगा। दिन में रेलवे स्टेशन से हसनपुर के 20 रुपये लगते हैं। टीम जब घंटाघर पर पहुंची तो यहां पर भी ऐसी ही स्थिति मिली। ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमाना किराया वसूले रहे थे।
सुरक्षा के लिहाज से भी ठीक नहीं
खास बात यह है कि रेलवे स्टेशन के बाहर पड़ताल के दौरान कई ऑटो ऐसे भी देखे गए जिन पर नंबर प्लेट ही नहीं थी। ऐसे में यदि किसी सवारी के साथ कोई घटना हो जाए तो यह पता लगाना बेहद मुश्किल होगा कि ऑटो का नंबर क्या था और उसका मालिक कौन है। जब ऑटो चालकों से उनकी यूनियन के बारे में पूछा गया तो पता चला कि यहां पर कोई यूनियन ही नहीं है।
चालकों ने यह दिया तर्क
ऑटो व ई-रिक्शा चालकों का मानना है कि रात के समय दूसरी तरफ से कोई सवारी नहीं मिल पाती है और उन्हें खाली ही वापस आना पड़ता है। ऐसे में उनकी बचत नहीं होती है।
वर्जन
ऑटो व ई-रिक्शा का किराया निर्धारित है। अगर चालक निर्धारित किराये से अधिक वसूल रहा तो यह बेहद गंभीर है। दिन व रात का किराये अलग नहीं है। यात्रियों से अधिक किराया नहीं वसूलने देंगे। जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- एमपी सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन