इसमें से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यमुना नदी को जीवित रखने और पशु पक्षियों के लिए 352 क्यूसेक पानी हर स्थिति में बैराज से यमुना नदी में छोड़ा जाता है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के समझौते के अनुसार 80 से 90 हजार क्यूसेक तक पूर्वी और पश्चिमी यमुना नहरों व यमुना नदी में वितरण की व्यवस्था की जा सकेगी। इससे ज्यादा जलस्तर होने पर पूरा पानी यमुना नदी में छोड़ा जाएगा।
वर्ष 2013 में बैराज से छोड़ा गया था आठ लाख क्यूसेक पानी
वर्ष 2013 में हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में भारी बारिश होने पर यमुना नदी बैराज से आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इससे जनपद सहारनपुर के निचले इलाकों नकुड, गंगोह के अलावा शामली, बागपत और दिल्ली में भयंकर बाढ़ आई थी। पहले भी हथिनीकुंड बैराज से जलस्तर बढ़ने पर यमुना नदी में पानी छोड़े जाने से दिल्ली डूबती रही है।
9 जुलाई से 13 जुलाई तक हथनीकुंड बैराज से छोड़ा सर्वाधिक पानी
तारीख जलस्तर (क्यूसेक में)
9 जुलाई 2,51,287
- 10 जुलाई 3,09, 526
- 11 जुलाई 3,59,760
- 12 जुलाई 2,23,730
- 13 जुलाई 1,53,768
बुधवार को यमुना नदी में जलस्तर की स्थिति
शाम 3 बजे हथनीकुंड बैराज पर कुल पानी 53 हजार 580 क्यूसेक
-यमुना नदी में छोड़ा गया पानी 36 हजार 260
शाम 4 बजे हथनीकुंड बैराज पर कुल पानी 50 हजार 728 क्यूसेक
-यमुना नदी में छोड़ा गया 32 हजार 908 क्यूसेक
नौ जुलाई को बैराज पर एक लाख क्यूसेक से अधिक जलस्तर होने पर शाम चार बजे हरियाणा को जाने वाली पश्चिमी व यूपी की पूर्वी यमुना नहरों को बंद कर दिया गया था। 13 जुलाई को जलस्तर कम होने पर हरियाणा की पश्चिमी यमुना नहर में शाम पांच बजे, यूपी की पूर्वी यमुना नहर में 14 जुलाई की शाम चार बजे पानी छोड़ा गया था।
रविवार को हथनीकुंड बैराज पर जलस्तर की स्थिति
रविवार को हथनीकुंड बैराज पर दोपहर 12 बजे जलस्तर 83 हजार 141 क्यूसेक था, जिसमें से 67 हजार 821 क्यूसेक पानी यमुना नदी व शेष पानी पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहर में शेयर के हिसाब से छोड़ा गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्वी यमुना नहर की क्षमता 4400 और पश्चिमी यमुना नहर की क्षमता 18000 क्यूसेक पानी की है।
नोट: हथनीकुंड बैराज कंट्रोल से दी गई जानकारी के अनुसार
यमुना में 80-90 हजार क्यूसेक से अधिक पानी आने पर उसमें पत्थर, रेत, बजरी आदि खनिज बहकर आते हैं। यदि इस पानी को पूर्वी और पश्चिमी नहरों छोड़ा जाता है तो दोनों नहरें सिल्ट जमने से बंद हो जाएगी और पूरी वितरण व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। इससे बैराज को भी खतरा उत्पन्न हो जाएगा। हथनीकुंड बैराज है बांध नहीं। इसलिए यहां पानी स्टोर नहीं किया जा सकता। हिमाचल की पहाड़ियों से आने वाले पानी को बैराज से आगे हर सूरत में छोड़ना ही पड़ता है। -अभिमन्यु राय,अधिशासी अभियंता पूर्वी यमुना नहर