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Saharanpur News: नजूल की संपत्तियों पर सरकार के फैसले से खलबली

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- महानगर में आवंटियों ने नजूल की संपत्तियों के स्वरूप बदले, तो कई ने बेच ही दी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नजूल की संपत्तियों को लेकर प्रदेश सरकार के रुख से यहां के आवंटियों और अन्य कब्जाधारियों में खलबली मच गई है। महानगर में नजूल की संपत्तियों का विवाद किसी से छिपा नहीं है। राजनीतिक संरक्षण के चलते कहीं नजूल की संपत्तियों पर कब्जे कर लिए गए हैं तो कहीं स्वरूप बदलकर होटल और शोरूम बना दिए गए हैं। इतना ही नहीं, कई आवंटियों ने नजूल की संपत्तियां बेच भी दी हैं। जिनके मामले में जिलाधिकारी द्वारा प्रमुख सचिव और नगरायुक्त को पत्र लिखे गए हैं।
दरअसल, महानगर में नगर पालिका के दौरान की 2.5 लाख वर्ग मीटर नजूल की भूमि है। इसमें एक लाख वर्ग मीटर के दो तालाब हैं, जिनमें एक मंडी समिति रोड स्थित धोबीवाला तालाब और दूसरा कमेला क्षेत्र स्थित सतीवाला तालाब है। एक तालाब पर कब्जा हो रहा है, जबकि दूसरे को नगर निगम ने कचरे से पाटकर खत्म किया हुआ है। शेष 1.5 लाख वर्ग मीटर में 90 हजार मीटर भूमि हनुमान मंदिर से अग्रसेन चौक, हनुमान मंदिर से जीपीओ तथा जीपीओ से अग्रसेन चौक तक है। रेलवे रोड पर 47 दुकानें थी, जिनका स्वरूप बदला जा चुका है। हनुमान मंदिर से जीपीओ रोड तक भी ज्यादातर संपत्तियों का स्वरूप बदलकर शोरूम बना दिए गए। रेलवे रोड और कोर्ट रोड की संपत्तियों में अनेक संपत्तियां बेची जा चुकी हैं, जो जांच में भी यह साबित हो चुका है। जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र की ओर से प्रमुख सचिव और नगरायुक्त को पत्र भी लिखे गए हैं।
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उधर, फजलुर्रहमान रोड पर बापूजी वाचनालय था, जिस पर कब्जा था। जिलाधिकारी ने जांच में कब्जा अवैध पाया था और संपत्ति को कब्जामुक्त कराने के लिए निगम को पत्र लिखा था, जिसमें अभी तक निगम कब्जा नहीं ले सका है। अब नजूल की संपत्तियों पर सरकार के फैसले ने संबंधित कब्जाधारियों की नींद उड़ा दी है।

जुबली पार्क में बढ़ा दी दुकानें
27 हजार वर्ग मीटर भूमि पर जुबली पार्क है। हैरानी की बात यह है कि नेहरू मार्केट के करीब 15 दुकानदारों ने जुबली पार्क की भूमि पर पीछे 20-20 फीट से अधिक तक दुकानें बढ़ाई हुई हैं। उनका कहना है कि उनके पास बैनामा है। सवाल यह है कि नजूल की संपत्ति पर बैनामा किसने किया। जुबली पार्क की अन्य संपत्ति पर भी दुकानें बनी हैं। बाकी कुछ जमीन जामा मस्जिद के बाहर है, जिसमें मार्केट बनी हुई है।
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वर्जन
नजूल की संपत्तियों को लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव पास हुआ है, लेकिन अभी तक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही आदेश आ जाएगा, जिसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कदम उठाए जाएंगे। यह सच है कि महानगर में नजूल की संपत्तियों को लेकर काफी विवाद है। संपत्तियों के स्वरूप बदलने से लेकर बेचने तक के मामले हैं।
- राजेश कुमार यादव, अपर नगरायुक्त/संपत्ति अधिकारी नगर निगम
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