सहारनपुर। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया भले ही ऑनलाइन कर दी गई हो, लेकिन संभागीय परिवहन कार्यालय के इर्द-गिर्द मंडराने वाले दलालों ने इसमें भी सेंध लगा दी है। सेंध भी ऐसी कि जो काम छह महीने में होता है वह मात्र एक महीने में पूरा कर दिया जाएगा। स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस मिलने की अवधि सरकारी नियमों के अनुसार छह महीने की होती है, लेकिन दलाल दावा करते हैं कि उनका खर्चा-पानी दो तो यह लाइसेंस एक महीने के अंदर आपके हाथ में होगा। न काउंटर पर जाने की जरूरत पड़ेगी और न ही कार्यालय के चक्कर काटने होंगे। अमर उजाला ने इसे लेकर पड़ताल की, जिसमें पूरे मामले का खुलासा हुआ है। दरअसल, अमर उजाला टीम ने आरटीओ कार्यालय के बाहर मंडराने वाले दलालों का पता किया। इसके बाद एक या दो नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग दलालों से स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए बातचीत की गई। इस बातचीत में जो सामने आया है उससे आरटीओ कार्यालय भी सवालों के घेरे में है।
- दलाल और संवाददाता के बीच हुई बातचीत
संवाददाता - भाईसाहब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है।
दलाल - बन जाएगा, इसके लिए आधार कार्ड व दसवीं की मार्कशीट चाहिए।
संवाददाता - अभी मार्कशीट तो नहीं है।
दलाल - कोई बात नहीं व्हाट्सएप पर मंगा लो, तुरंत फाइल तैयार करा देंगे।
संवाददाता - लर्निंग लाइसेंस की फीस कितनी है।
दलाल - सिर्फ एक हजार रुपये है।
संवाददाता : भाईसाहब इतनी फीस कहां है, उसमें तो 350 रुपये लगते हैं। आप ज्यादा बता रहे हो
दलाल - देख भाई फीस तो इतनी ही लगेगी, बनवाना है तो बनवा लो। थोड़े रुपये ज्यादा खर्च कर लोगे तो इधर-उधर नहीं दौड़ना पड़ेगा।
संवाददाता - स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस मिलने में कितने दिन लगेंगे।
दलाल - उसका समय छह महीने का है। तुम दो हजार रुपये का बंदोबस्त कर लो। एक महीने के अंदर स्थायी लाइसेंस बन जाएगा। मेरी जिम्मेदारी है।
संवाददाता - अब तो सब ऑनलाइन है, आप कैसे कराते हो।
दलाल - ये हमारी सेटिंग है। इसी बात के तो रुपये लेते हैं।
संवाददाता - ठीक है बनवा देना, मैं कल सभी कागज दे दूंगा।
दलाल : जब कागज और रुपये मिलेंगे, बनवा दूंगा।
यह उठ रहे सवाल
जिस तरीके से दलाल ने दावा किया उससे आरटीओ कार्यालय भी सवालों के घेरे में है। साफ है कि जब सब कुछ ऑनलाइन है तो फिर दलाल इतने दावे से कैसे कह रहे हैं वह लाइसेंस बनवा देंगे। कहीं न कहीं कार्यालय के अंदर भी उनकी सांठगांठ है, तभी ये संभव है।
इस तरह का मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है तो चेकिंग कर कार्रवाई की जाएगी। आवेदक सीधे कार्यालय में आकर संपर्क करें। शीघ्र समस्याओं का समाधान किया जाएगा। कोई भी काम नियम विरुद्ध नहीं होगा।
- महेंद्र बाबू गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन