देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलना कारी इस्हाक गोरा ने शनिवार को हेल्पलाइन के जरिये रोजेदारों की शंकाओं का शरीयत की रोशनी में समाधान किया। उन्होंने इफ्तार की अहमियत बयान करते हुए कहा कि रोजेदार को चाहिए कि वह रोजा इफ्तार करने से पहले दस्तरख्वान पर बैठ जाएं और अल्लाह से खूब दुआ किया करें।
सवाल : मुरादाबाद निवासी बिलाल ने पूछा कि उनके पिता को सांस का रोग है जिस कारण उन्हें अक्सर इनहेलर का प्रयोग करना पड़ता है। कहते हैं इसके प्रयोग से रोजा खत्म हो जाता है। क्या यह बात शरीयत के अनुसार सही है कि इससे प्रयोग से रोजा टूट जाता है?
जवाब- जी हां। अगर कोई व्यक्ति सांस का मरीज है और इनहेलर यानी मशीन के जरिये नाक में दवा का प्रयोग करता है तो शरीयत के अनुसार उसका रोजा टूट जाएगा।
सवाल- गाजियाबाद निवासी फारुक अहमद ने मालूम किया कि उनका बड़ा भाई सरकार को पूरा इनकम टैक्स अदा करता है पर जकात नहीं निकालता, कहता है कि इसी में जकात अदा हो जाती है। शरीयत के मुताबिक क्या यह सही है?
जवाब: अगर कोई व्यक्ति सरकार को पूरा इनकम टैक्स अदा करता है और फिर ये सोचता है कि टैक्स के साथ-साथ जकात भी अदा हो गई तो उसकी सोच बिल्कुल गलत है। क्योंकि इनकम टैक्स देश की जरुरियात के लिए दिया जा रहा है, जबकि जकात एक मुसलमान के लिए फर्ज-ए-खुदाबंदी और इबादत है। जकात को अलग से अदा करना फर्ज है।
सवाल-मुजफ्फरनगर निवासी दानिश ने पूछा कि कोई व्यक्ति रोजे रखता है, लेकिन नमाज नहीं पढ़ता, ऐसी सूरत में शरीयत उसके रोजे को सही मानेगी।
जवाब: नमाज और रोजा अलग-अलग फर्ज-ए-इबादत हैं, अगर कोई व्यक्ति रोजा रखता है पर नमाज नहीं पढ़ता इस तरह रोजा तो हो जाता है मगर उसके रोजे का सवाब अल्लाह के यहां मिलेगा ये देखने वाली बात है।रोजे के साथ नमाज भी पढ़नी चाहिए, जो नहीं पढ़ते वह गुनहगार होते हैं।
सवाल-हरियाणा के जगाधरी निवासी आशू ने मालूम किया कि उनके कमर पर एक फोड़ा हो रहा था रोजे की हालत में अचानक फूट गया क्या शरीयत के अनुसार उनका रोजा रहा या नहीं?
जवाब- शरीयत में आया है कि अगर किसी व्यक्ति का रोजे के हालत में जिस्म पर हो रहा फोड़ा या फुंसी फूट जाए तो इससे रोजा नहीं टूटेगा।