सहारनपुर। नगर निगम अपनी संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराने के प्रति गंभीर नहीं है। बाहरी कॉलोनियों में खाली पड़ी जमीनों पर कब्जे लिए जा रहे हैं। शहर के बीचोबीच हुए कब्जों पर निगम के अधिकारी दावा तक नहीं कर पा रहे हैं। निगम द्वारा बसाई गई पूरी कॉलोनियों और अधिकारियों के लिए बनाए गए आवासों तक पर कब्जे हो गए हैं। इतना होने पर भी निगम के अधिकारी सोते रहे।
बाबा लालदास मार्ग स्थित म्यूनिसिपल कॉलोनी में करीब 45 आवास बनाए गए थे। निगम से यह आवास 250, 400 और 500 वर्ग गज भूमि पर बने हैं। तत्कालीन बोर्ड ने इनमें से आधे आवास निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए थे, जबकि आधे गरीब लोगों को किराए पर दिए गए थे। ऐसे में किराए पर दिए गए आवास भी निगम की ही संपत्ति थी। उक्त पूरी कॉलोनी पर ही अन्य लोग काबिज हो गए। यानी निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बने आवास भी नहीं बचे। ज्यादातर किराएदारों ने धीरे-धीरे आवासों का स्वरूप बदलकर कोठियां बना दीं और निगम के अधिकारी सोते रहे। कॉलोनी में बनी वेलफेयर सोसायटी म्यूनिसिपल कॉलोनी के प्रधान अनिल तुली का कहना है कि उनके पास मकानों का बैनामा नहीं है। चूंकि सभी लोग 45-50 साल से रह रहे हैं। ऐसे में उनको बेघर न करते हुए उनके ही नाम बैनामा कर दिया जाए।
पुराना कलसिया रोड स्थित वाल्मीकि कॉलोनी के नाम से कॉलोनी में 150 क्वार्टर तैयार किए गए थे। यह क्वार्टर नगर निगम के कर्मचारियों के लिए बने थे, लेकिन शहर से थोड़ा दूर होने की वजह से कर्मचारियों ने वहां जाने से मना कर दिया। ऐसे में उक्त क्वार्टर नागरिकों को आवंटित कर दिए, लेकिन संपत्ति निगम की ही रहनी थी। निगम के ही संपत्ति विभाग से जानकारी मिली है कि वर्तमान में पूरी कॉलोनी में एक भी आवंटी नहीं है। क्योंकि आवंटी क्वार्टर बेचकर जा चुके हैं। वर्तमान में रह रहे लोगों ने क्वार्टरों का स्वरूप ही बदल दिया है। इतना कुछ हो गया और नगर निगम के अधिकारी देखते रहे।
खड़ी कर दी मार्केट, अब भी गंभीर नहीं अधिकारी बेहट बस अड्डा स्थित संपत्ति की लीज जुलाई 2022 में खत्म हो चुकी है। निगम ने करीब छह माह पहले उक्त संपत्ति से बस अड्डा हटाने और दुकानों को अपने कब्जे में लेकर उनका किराया खुद वसूलने का निर्णय लिया था, लेकिन स्थिति जस की तस है। शकलापुरी की ओर जाने वाले मार्ग की संपत्ति भी एक आश्रम को लीज पर दी हुई है, जिस पर 20 से अधिक दुकानें 15 साल पहले बना दी गई। उक्त दुकानों को समिति ने पगड़ी पर बेचा और किराया वसूल रही है, जबकि नियमानुसार निगम की अनुमति के बिना कोई निर्माण नहीं हो सकता था। अभी तक निगम के अधिकारी मौन हैं।
नोटिस भेजकर शांत बैठे अधिकारी बेहट रोड स्थित रसूलपुर में तालाब की भूमि पर कॉम्प्लेक्स बने हुए हैं। दो साल पहले संपत्ति अधिकारी ने नोटिस जारी किए थे। एक सप्ताह में जवाब नहीं देने पर ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी गई थी, लेकिन समय के साथ फाइल को दबा दिया गया। अब कहा जा रहा है कि उक्त मामला एसडीएम के यहां लंबित है।
-म्यूनिसिपल कॉलोनी के आवासों को लेकर जांच चल रही है। जिलाधिकारी के संज्ञान में पूरा मामला है। प्रयास यही है कि उक्त कॉलोनी नियमित हो, जिससे निगम को आय हो सके। बेहट बस अड्डा पर बनी दुकानों के दुकानदारों को नोटिस भेजे गए हैं। आश्रम को लीज पर दी गई भूमि पर दुकानें बनाने के मामले में भी जिलाधिकारी के निर्देश पर ही कोई कार्रवाई होगी।
- राजेश यादव, संपत्ति प्रभारी/अपर नगर आयुक्त।