-सहकारी समितियों के चुनाव में मिली सफलता से गदगद है भाजपा, निकाय चुनाव जीतने को लगाएगी एड़ी चोटी का जोर
-सपा से पूर्व विधायक तो बसपा से निवर्तमान चेयरमैन के पुत्र जता रहे प्रबल दावेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। नगर निकाय चुनाव का आरक्षण घोषित होते ही देवबंद में भी चुनावी सरगर्मी एकाएक बढ़ गई है। पिछली बार जहां देवबंद सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई थी, वहीं, इस बार यह अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी में आने से मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं, क्योंकि अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदार पार्टी का सिंबल पाने के लिए अपनी गोटियां फिट करने में जुटे हैं।
हालांकि अभी तक न तो चुनाव कार्यक्रम ही घोषित हुआ है न ही किसी राजनीतिक दल ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। बावजूद इसके कई निर्दलीय चुनाव लड़ने वालों ने तो बैनर पोस्टर भी चस्पा करवाना शुरू कर दिया है। सहकारी समितियों के चुनाव में मिली सफलता से गदगद भाजपा इस बार देवबंद सीट पर अपना कब्जा जमाने के लिए उत्साहित है, क्योंकि 1940 से लेकर 2017 तक जितने भी निकाय चुनाव हुए हैं उनमें अधिकांश मुस्लिम ही चेयरमैन बने हैं। इसका मुख्य कारण देवबंद नगर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। लेकिन इस बार भाजपा देवबंद सीट जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाएगी।
भाजपा से टिकट पाने के लिए दावेदारों की लंबी फौज है। इनमें दून वैली स्कूल के चेयरमैन राजकिशोर गुप्ता, नगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनोज सिंघल, भाजपा नगराध्यक्ष विपिन गर्ग, विनय कुच्छल व अशोक गुप्ता मुख्य हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी से पूर्व विधायक माविया अली और बसपा से निवर्तमान चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी के पुत्र जमाल अंसारी चुनाव लड़ने की पूर्व में ही घोषणा कर चुके हैं। माविया अली 2012 से 2016 तक नगरपालिका के चेयरमैन रह चुके हैं। वहीं, कांग्रेस पार्टी से नौशाद कुरैशी अपनी प्रबल दावेदारी जता रहे हैं। कुरैशी कई दिनों से स्थानीय नेताओं के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। वहीं, चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पूर्व ही दावेदारों ने मतदाताओं से संपर्क साधना भी शुरू कर दिया है।