सहारनपुर। लोकसभा चुनाव के लिए मैदान तैयार हो चुका है। केवल खिलाड़ियों के उतरने की देर है। 2019 में बेहद कम अंतर से हार के बाद भाजपा के लिए यह सीट चुनौती बनी हुई है। भाजपा ने अधिकतर सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। कैराना सीट पर भी पहली सूची में ही मौजूदा सांसद प्रदीप चौधरी को प्रत्याशी बना दिया था, लेकिन इस सीट पर गहन मंथन चल रहा है। सहारनपुर सीट पर पूर्व सांसद राघव लखनपाल मजबूत दावेदारों में मानें जाते हैं, लेकिन पहली सूची में उनका नाम नहीं आने पर तमाम तरह की अटकलें भी शुरू हो गई थी। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो राघव लखनपाल के अलावा भाजपा के कई अन्य नेता भी अंदरखाने टिकट का जुगाड़ लगा रहे हैं। हालांकि चुनाव शेड्यूल घोषित होते ही अब यह इंतजार भी एक-दो दिन में खत्म हो जाएगा कि भाजपा से कौन मैदान में आएगा।
कांग्रेस इन पर खेल सकती है दांव
भाजपा की तरफ कांग्रेस भी प्रत्याशी को लेकर मंथन में जुटी है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की स्क्रेनिंग कमेटी ने पूर्व विधायक इमरान मसूद और पूर्व एमएलसी गजे सिंह का नाम फाइनल कर आला कमान को दिया गया है। गजे सिंह साल 2000 में ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं और 2004 में एमएलसी का चुनाव जीते थे। 2009 में वह लोकसभा चुनाव में भी उतरे थे, लेकिन जीत नहीं मिल सकी थी। हालांकि पूर्व विधायक शुरूआत से ही दावा कर रहे हैं कि टिकट उन्हें मिलेगा। देखना है कि पार्टी इनमें किस पर दांव खेलती है।
2019 की तरह बसपा ने खेला है मुस्लिम कार्ड
सहारनपुर सीट पर अभी केवल बसपा ने लोकसभा क्षेत्र प्रभारी माजिद अली को मैदान में उतारा है। कपड़े का कारोबार करने वाले माजिद अली फिलहाल जिला पंचायत सदस्य है। पिछली बार गठबंधन से बसपा ने हाजी फजर्लुरहमान को मैदान में उतारा था, जिन्होंने भाजपा को हराकर जीत हासिल की थी। मुस्लिम बाहुल्य मानी जाने वाली सहारनपुर लोकसभा सीट पर बसपा ने एक बार फिर से मुस्लिम कार्ड खेला है। हालांकि सांसद हाजी फजर्लुरहमान भी टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। जिसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने कई बार बयान दिया कि वह पार्टी छोड़ रहे हैं। अब उनका कहना है कि वह पार्टी में ही रहेंगे, लेकिन निरपेक्ष रहेंगे।