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आठ करोड़ खर्च, फिर भी और दूषित हो गई पांवधोई

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दालमंडी पुल पांवधोई नदी गंदगी से भरी नदी - फोटो : SAHARANPUR
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आठ करोड़ खर्च, फिर भी और दूषित हो गई पांवधोई
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सहारनपुर। पांवधोई नदी को साफ करने के लिए नगर निगम बीते 12 साल से अभियान चला रहा है। इन अभियानों पर आठ करोड़ रुपये खर्च कर दिए, इसके बाद भी पांवधोई साफ होने के बजाए और मैली हो गई है। पांवधोई नदी ढमोला नदी के जरिए हिंडन नदी में गिरती है। सरकार की प्राथमिकता वाली हिंडन को दूषित करने में पांवधोई नदी भी जिम्मेदार है।
पांवधोई नदी शहर के बीच से होकर गुजरती है, जिसका स्थानीय स्तर पर आध्यात्मिक महत्व भी है। वर्ष 2010 में तत्कालीन जिला अधिकारी आलोक कुमार ने नदी की स्वच्छता का बीड़ा उठाया था। तब नदी को साफ और सुरक्षित करने पर बड़ा कार्य हुआ था। नदी की सफाई के साथ ही इसके दोनों ओर दीवारें बनाकर जाली लगाई गई थी, जिससे कोई व्यक्ति इसमें कचरा ना डाल सके। उनके बाद नदी में पेंचिंग का कुछ कार्य पूर्व मंडलायुक्त आरपी शुक्ला द्वारा कराया गया था। नदी की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम पर आ गई। नगर निगम नदी की सफाई के लिए प्रत्येक वर्ष अभियान शुरू करता है। अब नतीजा यह है कि नदी साफ होने की बजाय बीते 12 साल में और दूषित हुई है। कई जगह इसका पानी जलीय जीवों के लिए भी खतरा बन गया है। निगम के पास अलग से बजट नहीं है, लेकिन समय-समय पर अधिकारी नदी को सुंदर और साफ करने के लिए करोड़ों रुपया खर्च करते रहे हैं। पूर्व मंडलायुक्त सीपी त्रिपाठी के कार्यकाल में बाबा लालदास घाट पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च कर पेंचिंग और पुल बनाया गया था। उनसे पहले आरपी शुक्ला के द्वारा पेंचिंग का कार्य कराया गया था। 2010 में डीएम आलोक कुमार के द्वारा अनेक कार्य कराए गए थे।
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निर्णय लिए जाते हैं अमल नहीं होता
पांवधोई नदी में शहर भर के सीवर और नालियां छोड़ी गई हैं। अनेक लोगों ने अपने प्रतिष्ठानों और घरों तक के सेफ्टी टैंक के पाइप इसमें डाले हुए हैं। कई उद्योगों का कैमिकलयुक्त पानी भी इसमें गिरता है, जिसके कारण कई बार इसमें मछलियां मर चुकी हैं। नगर निगम के पूर्व के अधिकारी नदी में डल रहे सीवर और नालों के लिए अलग से व्यवस्था करने के निर्णय लेते रहे हैं, जैसे एसटीपी आदि स्थापित कर उसके जरिए सीवर और नालों का पानी साफ करके नदी में डालना। लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ है।
इसलिए पूरी तरह सक्रिय नहीं है समिति
पांवधोई बचाओ समिति में जिला अधिकारी अध्यक्ष, अपर जिला अधिकारी प्रशासन सचिव और नगर आयुक्त उपाध्यक्ष होते हैं। वर्तमान में पर्यावरणविद डॉ. पीके शर्मा इसके कुलसचिव हैं। समिति में महानगर के गण्यमान्यों के साथ ही कुछ पर्यावरणविद भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि समिति में शामिल कुछ अधिकारियों के समय समय पर बदल जाने और रूचि नहीं लेने की वजह से समिति पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पा रही है।
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पांवधोई तब तक पूरी तरह साफ नहीं होगी, जब तक सीवर और नाले डलना बंद नहीं होगी। इनकी टेपिंग का कार्य लंबा प्रोसेस है, जिसमें समय लगेगा, लेकिन नालों की टेपिंग का इंतजार नहीं कर सकते हैं। इसलिए अभियान चला रहे हैं। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। साथ ही नदी में कचरा डालने वालों पर जुर्माने के लिए प्रवर्तन दल को सक्रिय किया गया है। सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाने हैं।
गजल भारद्वाज, नगर आयुक्त।

कुमार टाकिज पुल के नीचे पांवधोई नदी में भरी गंदगी- फोटो : SAHARANPUR

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