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UP: धान के बौने रोग ने बढाई किसानों की परेशानी, सुगंधित बासमती को सबसे ज्यादा खतरा

Thu, 25 Aug 2022 11:27 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

एक ही खेत में धान की फसल के बीच में कहीं कहीं पौधे बौने आकार के रह गए हैं, जबकि अन्य पौधों की पूरी बढ़वार है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह बौने रोग के लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में दर्जन भर खेतों में उन्हें यह रोग दिखाई दिया है।
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ग्राम चकसराय में धान की फसल का निरीक्षण करते कृषि वैज्ञानिक - फोटो : SAHARANPUR
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में कई क्षेत्रों में धान में बौने रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसमें धान की फसल में कुछ पौधे तो पूरी बढ़वार कर रहे हैं, जबकि कुुछ पौधे छोटे ही रह गए हैं। इसे बैक्टीरियल और फंगस का संयुक्त प्रकोप माना जा रहा है। पूसा बासमती- 1509 और पूसा बासमती- 1121 प्रजातियों में इस रोग को अधिक देखा जा रहा है। पूरी फसल की बराबर बढ़वार नहीं होने से प्रभावित खेत की उत्पादकता कम रहने की आशंका है।

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जनपद के कई क्षेत्रों में धान में बौनेपन की समस्या दिखाई दे रही है। इसमें एक ही खेत में धान की फसल के बीच में कहीं कहीं पौधे बौने आकार के रह गए हैं, जबकि अन्य पौधों की पूरी बढ़वार है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया।

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उन्होंने बताया कि जनपद में दर्जन भर खेतों में उन्हें यह रोग दिखाई दिया है। इसमें प्रभावित पौधे अविकसित रह जाते हैं। इनकी पत्तियां पीली, लाल और सूखने जैसी दिखाई देती हैं। गांव चक सराय के किसान मेहरबान, तरुण, कुंता, पुंवारका के किसान अनिल कुमार और देवला के किसान सुरेश आदि के खेतों के धान की फसल इस रोग से ग्रसित दिखाई दी।
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धान की फसल में इस प्रकार का रोग पहली बार दिखाई दे रहे हैं। इसके कारणों पर कृषि वैज्ञानिक मंथन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस रोग पर नियंत्रण के लिए किसानों को कासुगामाइईसन 200 ग्राम और थायो फिनेट मिथाइल 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए।

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