नसीम बेसिक स्कूल में आयोजित सेमिनार में विचार रखते सरदार दलजीत सिंह कोचर
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सहारनपुर। डॉ. कुदसिया अंजुम ने कहा कि दुनिया भर में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन होता था। उनके खिलाफ असमानता और अन्याय की घटनाओं को देखते हुए 18 दिसंबर 1992 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अल्पसंख्यक अधिकार दिवस की घोषणा की थी। वह अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर परचम संस्था एवं अल्पसंख्यक संस्थान संघ द्वारा नसीम बेसिक स्कूल में आयोजित सेमिनार में अपनी बात रख रही थीं।
उन्होंने कहा कि भारत में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन अल्पसंख्यक समूह मे आते हैं। भारत में भी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया है। अध्यक्षता कर रहे इस्लामिया इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य जलाल उमर ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 में अल्पसंख्यकों को विषेश अधिकार मिले हुए हैं। जिसके तहत अपने शैक्षिक संस्थाओं को स्थापित करने, धर्म और संस्कृति की रक्षा का अधिकार है।
नसीम बेसिक स्कूल के चेयरमैन वसीम ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करता है। विशिष्ठ अतिथि उर्दू वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन राव अब्दुल सत्तार ने कहा कि सभी अल्पसंख्यकों साथ में काम करने की जरूरत है। मुख्य अतिथि राव सरदार दलजीत सिंह कोचर ने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय है। उनके लिए विभिन्न योजनाएं चला रहा है। मौलाना आजाद फाउंडेशन के तहत विभिन्न स्कॉलरशिप हालांकि अभी कुछ कटौती स्कॉलरशिप में की गई है जो एक कमजोर वर्ग के लिए नाइंसाफी है। सेमिनार में फरजाना शेख़, अफसारा परवीन, यूसरा आसिफ़ शम्सी, बुशरा खदीजा, शान शम्सी, ईरा नबी, पवन राणा आदि मौजूद रहे।
नसीम बेसिक स्कूल में आयोजित सेमिनार में भाग लेती महिलाएं- फोटो : SAHARANPUR