सहारनपुर। केंद्र सरकार की ओर से पारित किए गए नए सड़क कानून को लेकर साल के पहले ही दिन परिवहन व्यवस्था बेपटरी हो गई। रोडवेज बस, ऑटो और ट्रकों की हड़ताल से संचालन पूरी तरह ठप रहा। एक ओर जहां ऑटो चालकों ने प्राइवेट वाहनों में लोगों को नहीं बैठने दिया तो वहीं दूसरी ओर रोडवेज बस वर्कशॉप से बाहर नहीं निकल पाई। ऐसी स्थिति में लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई किलोमीटर तक लोगों को पैदल चलना पड़ा। चालकों ने नए कानून का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। वाहनों के चक्का जाम से ट्रांसपोर्ट पर 40 से 50 फीसदी असर पड़ा, जबकि रोडवेज बसों के पहिये थमने से 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
कांशीराम काॅलोनी व रेलवे रोड बस अड्डा
दिल्ली रोड कांशीराम काॅलोनी रोडवेज के अस्थायी बस अड्डे से सुबह पांच बजे पहली सेवा शुरू हुई। इसके बाद बस अड्डे से कोई बस नहीं चली। ऑटो चालक भी ऑटो को सड़क किनारे खड़ा कर प्रदर्शन करने लगे। यही नहीं जो भी ऑटो आता, उसे रोककर खाली कराया गया। अन्य प्राइवेट वाहनों से भी यात्रियों को उतार दिया गया। यही हाल रेलवे रोडवेज बस अड्डे का रहा। यहां भी यात्री रोडवेज बसों के इंतजार में खड़े रहे। रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यात्रियों ने ट्रेनों का सहारा लिया। श्रीगंगानगर-ऋषिकेश इंटरसिटी एक्सप्रेस में खासी भीड़ रही।
क्या बोले यात्री
- बिहार के सहरसा निवासी सुरेश पंडित ने बताया कि वह सुबह नौ बजे रेलवे स्टेशन पर आए। इसके बाद वह रेलवे रोड बस अड्डे पर पहुंचा। यहां पता लगा कि हड़ताल के कारण बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इससे उन्हें परेशानी हुई।
- दिव्यांग विनोद बताते हैं कि देहरादून जाना था, लेकिन हड़ताल के कारण बसों के बंद होने से परेशानी हुई। निधि को भी देहरादून जाना था। रामपुर मनिहारान निवासी रेखा अपने बच्चे के साथ देहरादून जा रही थी। लेकिन, बसों के बंद होने से मायूसी हुई।
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फैक्ट फाइल
सहारनपुर मंडल में रोडवेज बस : 641
प्रतिदिन यात्री : 95 हजार से एक लाख
प्रतिदिन राजस्व : 75 से 80 लाख तक
जिले में प्राइवेट बस : 500
ट्रांसपोर्ट पर असर : 40 से 50 फीसदी
ऑटो : करीब 3200
ई-रिक्शा : करीब 10 हजार