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पुरानी यमुना के 22 साल से टूटे रपटे की नहीं ली सुध

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साढ़ौली कदीम। पुरानी यमुना नदी के 22 साल पहले टूटे रपटे की विभाग सुध नहीं ले रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर नदी पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि भी उनकी समस्या का निदान नहीं कर पा रहे हैं।
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विकास खंड साढ़ौली कदीम के गांव शेखपुरा के संपर्क मार्ग पर पुरानी यमुना नदी का रपटा वर्ष 1998 में लोनिवि द्वारा बनाया गया था। वर्ष 1999 में नदी में आए पानी के साथ ही यह टूट कर क्षतिग्रस्त हो गया था। तब से इस रपटे एवं मार्ग की किसी ने सुध नहीं ली। स्थानीय ग्रामीण बरसात के दिनों में जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। गंदेवड़ चिलकाना मार्ग से गांव शेखपुरा तक जाने वाले लगभग तीन किलोमीटर मार्ग की हालात भी जर्जर हो चुकी है। पूरा मार्ग गहरे गड्ढों में तब्दील हो गया है। इस मार्ग से गांव शेखपुरा सहित मीरपुर ठसका, धौलरा, रसूली, नुनयारी आदि कई गांवों के छात्र-छात्राओं एवं राहगीरों का नियमित आवागमन होता है।
शेखपुरा के पूर्व प्रधान सोमपाल सिंह सहित क्षेत्रीय ग्रामीण ललित गुप्ता, विमल कुमार, विनोद कुमार, मांगेराम गांव मीरपुर ठसका के चौ. नारायण सिंह, विमल कुमार रसूली के विश्वास लंबरदार, कासिम, फुरकान आदि का कहना है कि उक्त मार्ग एवं रपटे की मरम्मत को लेकर वे कई बार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उधर, लोनिवि के जेई ऋतुराज सिंह का कहना है कि यह मार्ग अब उनके विभाग के पास है। पूर्व में किस विभाग द्वारा कार्य कराया गया यह भी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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