चिलकाना क्षेत्र से निशान लेकर बागड जाते जातरू
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चिलकाना/तल्हेड़ी बुजुर्ग/देवबंद (सहारनपुर)। तीज का त्योहार संपन्न होते ही बागड़ यात्रा का दौर शुरू हो गया है। ढोल नगाड़ों की थाप के बीच उल्लास के साथ श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर बागड़ यात्रा के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। उधर देवबंद से छठवीं बार भगत दीपक पैदल ही बागड़ धाम के लिए निकले।
चिलकाना क्षेत्र से करीब 50 श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने के बाद बागड़ का निशान लेकर प्रस्थान कर चुके हैं। हरियाली तीज के दिन रात्रि में निशान खड़ा किया जाता है तथा अगले दिन उस निशान को लेकर भक्तों के साथ बागड़ की यात्रा शुरू हो जाती है। श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर पीले कपड़े पहनकर निशान को लेकर बागड़ जाते हैं। बागड़ जाने से पहले निशान को ग्रामीणों के साथ महिलाओं द्वारा जाहरवीर के गीत गाते हुए गांव के साथ भी धार्मिक स्थलों पर घुमाया जाता है। इसके बाद राजस्थान के बागड़ में गुरु गोरखनाथ की गद्दी तथा जाहरवीर की म्हाड़ी पर अपने निशान को चढ़ा कर आते हैं।
तल्हेडी बुजुर्ग से बागड़ यात्रा पर रवाना हुए श्रद्धालुओं में तीन साल का कान्हा सबके आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान सुरेश, प्रमोद, प्रदीप, रमेश, कर्म सिंह आदि मुख्य सेवा में रहे। इसके साथ ही तुषार भी बागड़ यात्रा के लिए रवाना हुआ। देवबंद से इंद्रा कालोनी निवासी भगत दीपक कुमार छठी बार श्री गोरखनाथ टिल्ला जहावीर गोगा म्हाड़ी पूजा स्थल की बागड़ यात्रा के लिए पैदल निकले। उन्होंने बताया कि वे 350 किमी की पदयात्रा नंगे पांव ही करेंगे। 11 अगस्त को वे बागड़ पहुंचेंगे।