शामली। मुनि श्री 108 विव्रत सागर मुनिराज ने कहा कि जीवन में हर व्यक्ति कुछ न कुछ कमा रहा है, लेकिन धन-दौलत कमाने का एक निश्चित समय होता है।
जैन धर्मशाला में प्रवचन करते हुए मुनिराज ने बताया कि इसे पंचम काल का सबसे बड़ा चमत्कार माना जाता है। इस व्यस्त समय में भी, जब लोगों के पास सांस लेने का भी समय नहीं होता, अगर वे दिव्य ज्ञान सुनने और प्रवचन सुनने के लिए एक घंटा भी निकाल लेते हैं, तो यह भी एक बहुत बड़ा पुण्य है। धन कमाने की तरह ही रिश्तों को निभाने की भी एक सीमा होती है। लोग साल में एक बार, छह महीने में या महीने में एक बार ही रिश्तेदारों से मिल पाते हैं। परिवार का संचालन करने का भी एक निश्चित समय होता है। लोग केवल दो रोटी के लिए नहीं, बल्कि मोह, ममता और अमर भाव की मजदूरी के कारण लगे रहते हैं। मुनिराज बताते हैं कि पुण्य और पाप की कमाई हर समय, निरंतर चलती रहती है, चाहे व्यक्ति जाग रहा हो, सो रहा हो, बैठा हो या चल रहा हो। इसके लिए कोई विश्राम नहीं है। चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन सविता जैन, सीमा जैन व रेखा जैन ने किया। पाद प्रक्षालन अरुण जैन, मनीष जैन, मोहित जैन, अनिल जैन और शास्त्र भेंट आशी जैन, सुमित्रा जैन ने किया।