सहारनपुर। नगर निगम के 109 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में आ गई है। शासन ने नगर आयुक्त गजल भारद्वाज को पत्र लिखकर उक्त कर्मचारियों की नौकरियों को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। जिसके बाद से संबंधित कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। उक्त कर्मचारियों ने नगर आयुक्त से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है।
वर्ष 1991 में सफाई नायक ताराचंद ने तत्कालीन नगर पालिका परिषद सहारनपुर में त्यागपत्र देकर रिक्त हुए पद पर अपने पुत्र संजय आदिवाल को नियुक्त करने का अनुरोध किया था। तत्कालीन पालिका अध्यक्ष के आदेश पर संजय आदिवाल को पिता की जगह सफाई नायक के पद पर नियुक्ति दे दी गई थी। इसके बाद वह निरंतर सफाई नायक के तौर पर नौकरी करते रहे। सेवाकाल में 2019 में संजय आदिवाल की मृत्यु हो गई। संजय की मृत्यु के बाद उनके पुत्र करन आदिवाल ने मृतक आश्रित के रूप में नौकरी दिए जाने के लिए निगम में आवेदन किया। उनके प्रार्थनापत्र पर अग्रिम कार्रवाई करते हुए नगर आयुक्त ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की गई आख्या में कहा गया कि नगर विकास अनुभाग-6 के शासनादेश के अनुसार संजय आदिवाल की नियुक्ति अवैध मानते हुए करन आदिवाल को मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति नहीं दी जा सकती। ऐसे में करन आदिवाल का आवेदन निरस्त कर दिया गया। यह भी बताया गया कि चूंकि संजय आदिवाल की नियुक्त अवैध थी तो उनकी नियुक्ति को समाप्त करने के आदेश वर्ष 2002 में हुए थे, लेकिन किन्हीं कारणों से तत्कालीन अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया।
नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव कल्याण बनर्जी ने मामले में नगर आयुक्त गजल भारद्वाज को पत्र लिखते हुए कहा है कि चूंकि संजय आदिवाल की नियुक्ति अवैध थी। ऐसे में करन आदिवाल द्वारा मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति प्रदान करने के प्रत्यावेदन को आपके द्वारा निरस्त करने का निर्णय उचित है। ऐसे में नगर निगम में इस प्रकार की अन्य अवैध नियुक्तियों को निरस्त करते हुए नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करें। संयुक्त सचिव के उक्त आदेश के बाद से नगर निगम में पिता की जगह इस तरह से नौकरी वाले वाले करीब 109 कर्मचारियों और उनके परिवारों में खलबली है। मामले को लेकर 50 से अधिक कर्मचारी नगर आयुक्त गजल भारद्वाज से मिले और न्याय करने की मांग की।
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नौकरी खत्म की तो कहां जाएंगे कर्मचारी और उनके परिवार
सफाई कर्मचारी नेता सोनी आजाद ने बताया कि नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव के आदेश के बाद नगर आयुक्त द्वारा अपर नगर आयुक्त राजेश यादव को कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं, जिसके बाद से सभी कर्मचारी परेशान हैं। संबंधित कर्मचारियों में कई कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके सेवानिवृत्त होने के पांच से दस साल रह रहे हैं। जिंदगी के ऐसे पड़ाव में यदि उनको नौकरी से निकाला जाता है तो यह अन्याय होगा। नगर आयुक्त से मिलकर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करने की मांग की गई है, जिससे कर्मचारियों के परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएं।
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वर्जन
अवैध नियुक्तियों को निरस्त करने के संबंध में शासन से एक आदेश आया है। हम अधिकारियों की एक समिति बना रहे हैं, जो नियुक्तियों की जांच करेगी। बिना जांच के जल्दबाजी में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। चूंकि शासन का आदेश है तो उनके अनुरूप ही कदम उठाया जाएगा।
- गजल भारद्वाज, नगर आयुक्त।