सहारनपुर के बेहट में 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के शिवालिक जंगल में इन दिनों तस्करों का आतंक है, जो बेखौफ होकर कीमती वन संपदा का विनाश करने पर तुले हुए है।
आए दिन जंगल से बड़ी संख्या में कीमती पेड़ काटे जा रहे हैं। सबसे ज्यादा कुल्हाड़ा शिवालिक जंगल मे मिलने वाले सबसे कीमती खैर के पेड़ों पर चल रहा है।
तस्करों की इस करतूत से जहां सरकार को भारी भरकम राजस्व की हानि हो रही है, वहीं पर्यावरण और जंगल में विचरण करने वाले दुर्लभ वन्य जीव जंतुओं पर भी खतरा बढ़ रहा है। यदि तस्करों पर अंकुश नहीं लगा, तो वह दिन दूर नहीं जब शिवालिक जंगल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
ऐसा नहीं है कि वन रक्षकों की इसकी खबर नहीं, बल्कि स्थिति और हालात से वाकिफ होते हुए भी विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। एकाध बार वन विभाग की टीम हरकत में आ जाती है, मगर कभी व्यापक स्तर पर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया
जिससे जंगल उजड़ने से बच सके। पिछले दिनों बादशाहीबाग में वन विभाग की टीम और खैर तस्करों के बीच हुई फायरिंग की घटना कोई नहीं है। आए दिन तस्कर हथियारों से लैस होकर दिन ढलते ही जंगलों में घुस जाते है और खैर समेत अन्य पेड़ों का कटान करके लकड़ियां वाहनों में भरकर बाहर निकल जाते है।
तस्करों का आतंक इस कदर है, कि वनकर्मी उन्हें पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वर्ष 2015-16 में शिवालिक जंगल की तीनों रेंज बादशाहीबाग, शाकंभरी और मोंहड में खैर तस्करी के 57 मामले पंजीकृत किए गए, जिनमें बादशाहीबाग में 33, शाकंभरी में 23 और मोंहड में एक मामला दर्ज है।
इन सभी मामलों में 148 अपराधी पंजीकृत किए गए। बादशाहीबाग में सबसे अधिक 98 अपराधी पंजीकृत किए गए, जिनमें पांच अज्ञात शामिल है। शाकंभरी देवी में 47 और मोंहड में 4 अपराधी पंजीकृत किए गए।
बादशाहीबाग रेंज में पंजीकृत अपराधियों से खैर की लकड़ी 15.9193 घनमीटर आयतन प्रकाष्ठ बरामद किया गया, जिसकी कीमत 327553 रुपये, शाकंभरी रेंज में पंजीकृत अपराधियों से 9.5886 घनमीटर आयतन प्रकाष्ठ बरामद किया गया,
जिसकी कीमत 195595 रुपये और मोंहड़ रेंज में पंजीकृत अपराधियों से 1.6188 घन मीटर आयतन प्रकाष्ठ बरामद किया गया, जिसकी कीमत 31730 रुपये है। खैर तस्करी के यह आंकड़े तीनों रेंज कार्यालय से प्राप्त किए गए है, हालांकि हकीकत इन आंकड़ों को झूठलाती है।
वन विभाग के अधिकारी राजनीतिक दवाब के चलते सभी मामले पंजीकृत नहीं कर पाते। यदि सभी मामले पंजीकृत किए जाते तो इनकी लंबी फेहरिस्त होती।
जंगल की सुरक्षा के लिए बाहर से स्टॉफ बुलाया जा रहा है। टीमें बनाकर तस्करों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। वनकर्मियों पर हमले की घटनाएं भी बढ़ी है, जिसके मद्देनजर वनकर्मियों को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जाने के लिए शासन को लिखा गया है।
- आरआर गौतम शिवालिक वन प्रभाग, सहारनपुर