कई राज्यों की सीमा पर बसे सहारनपुर में गोवंश तस्करी का पूरा सिंडिकेट सक्रिय है। बार्डर पर सिंडिकेट हर गतिविधि पर नजर रखता है और लगातार सूचनाएं आदान-प्रदान करता है। सब कुछ सही होने पर ही गोवंश तस्कर अपने वाहन को सीमा से निकालते हैं।
इसमें गोवंश से भरे वाहन से करीब चार किलोमीटर पहले दूसरे वाहन से तस्कर रेकी भी करते हैँ। जिससे आगे किसी तरह की सतर्कता की जानकारी वे दे सकें। सहारनपुर के रास्ते वेस्ट यूपी के कई जिलों तस्करों का जाल फैला हुआ है।
दरअसल, वेस्ट यूपी में सक्रिय गोवंश तस्करों का गैंग पंजाब, हरियाणा से लेकर जम्मू तक फैला हुआ है।
इसमें दूसरे राज्यों से गोवंश लेकर उन्हें भेजने और लाने वाले हर राज्य में अपने सिंडिकेट से संपर्क में रहते हैं। सहारनपुर की सीमा से पहले एक गैंग उनके रूट की रेकी करता है और सीमा पार कराने की व्यवस्था करता है। पुलिस सूत्रों की मानें तो तस्कर सबसे ज्यादा बेहट के हथिनीकुंड बैराज, गंगोह और नकुड़ के रास्तों का उपयोग करते हैं।
कारण, कई किलोमीटर तक हरियाणा की सीमा से लगे इन इलाकों में पुलिस मुस्तैदी न के बराबर होती है। इसके अलावा इन इलाकों में लोकल रास्तों की जानकारी होने के चलते तस्कर बेरोक-टोक आसानी से निकल जाते हैं। बताया जाता है कि इसमें तस्कर कई स्तर पर काम करते हैं।
इनमें सबसे पहले जम्मू, पंजाब और हरियाणा में पशुपालन के नाम पर तस्कर गोवंश की खरीदारी करते हैं और उन्हें दूसरे गैंग के हवाले करते हैं। जिसे तस्करों का एक गैंग उन्हें सीमा पार कराकर गंतव्य तक पहुंचाते हैं। इसके बाद लोकल गैंग के पास पहुंच जाता है।
आपको बता दें कि करीब चार साल पहले सरसावा में तस्करी के एक वाहन को सीमा पार कराने की जुुगत में लगे तस्कर को स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया था। उसमें उसकी बाइक को भी आग लगा दी गई थी। हालांकि मौका पाकर तस्कर भाग निकला था।
चुनावी सीजन में हर सीमा पर पुलिस बल तैनात है और उसे हर सूरत में तस्करी पर शिकंजा कसने का निर्देश दिया गया है। चुनाव बाद हम अभियान चलाएंगे और इस पर कड़ी कार्रवाई भी करेंगे।
- आरपी सिंह यादव, एसएसपी