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कवि की कड़वी वाणी से हंगामा

Sun, 01 May 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद
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काव्य पाठ करता युवा कवि। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मेला पंडाल में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में उस समय हंगामा हो गया, जब एक कवि ने रचना से हटकर धर्म विशेष के लोगों पर अभद्र टिप्पणी करनी शुरू कर दी।
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इससे पंडाल में मौजूद एक समुदाय विशेष के लोगों में रोष पनप गया। गनीमत हुआ की लोगों ने सूझबूझ से काम किया और वह चुपचाप कार्यक्रम का बहिष्कार कर पंडाल से बाहर निकल गए। 

शुक्रवार की रात्रि मेलापंडाल में आमंत्रित शायर शानदार रचनाएं प्रस्तुत कर रहे थे। वहां मौजूद दोनों धर्मों के लोग इसका आनंद ले रहे थे। करीब एक घंटा गुजरने के बाद भाजपा के थानाभवन विधायक सुरेश राणा मंच पर पहुंचे तो काव्य पाठ कर रहे लखनऊ के कवि प्रख्यात मिश्रा ने अपना आपा खो दिया।
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भारत माता की जय पर दिए गए फतवे का हवाला देते हुए कवि ने अभद्र टिप्पणी करना शुरू कर दी। इससे पंडाल में मौजूद धर्म विशेष के लोगों में रोष पनप गया। गनीमत यह रही कि लोग बिना कुछ बोले वहां से चुपचाप चले गए। कवि की कड़वी वाणी को लेकर मुस्लिम ही नहीं हिंदू बुद्धिजीवियों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि यह मेला हमेशा से हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। ऐसे में पंडाल के मंच से धर्म विशेष के लोगों पर टिप्पणी करना खेदजनक है। 

हिंदू मुस्लिम एकता समिति के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम कुरैशी ने भी कवि सम्मेलन में धर्म विशेष के लोगों पर अभद्र टिप्पणी को गलत बताते हुए इसकी घोर निंदा की है। ऐसे में किसी बाहरी कवि के द्वारा धर्म विशेष के गुरुओं पर अभद्र टिप्पणी करना निंदनीय है। 

बहुत अनमोल दौलत है दुआ, ले लो बुजुर्गों की 
मेला पंडाल में शुक्रवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, लखनऊ आदि शहरों से पहुंचे कवियों ने खूब तालियां बटोरी। 

कार्यक्रम का उद्घाटन नगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजय सिंघल (बिट्टू) ने फीता काटकर एवं भाजपा नेता पंकज त्यागी ने किया। कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि थानाभवन विधायक सुरेश राणा रहे। सम्मेलन का शुभारंभ लखनऊ की कवियत्री व्याख्या मिश्रा की सरस्वती वंदना से हुआ।

दिल्ली के कुशल कुशवाह की पंक्तियां यूं थी ‘खुशी लख चैन अब सबके घरानों में नहीं मिलती, सुकूं की जिंदगी हमें दुकानों पर नहीं मिलती, बहुत अनमोल दौलत है दुआ ले लो बुजुर्गों की, ये वो दौलत है जो हमको खजानों में नहीं मिलती’।

दिल्ली के योगेंद्र सुंदरलाल ने कहा ‘जिसने रण में दी आहुति उस जैसी ही चाल चलेंगे, बलिदानी पथ पर चलकर कुछ तो नया कमाल करेंगे’। 
मेरठ के डा. शुभम त्यागी की पंक्तियां थी ‘मोहब्बत का अपनी असर देख लेना, उड़ती हवा सी खबर देख लेना’।

गाजियाबाद की सुमेधा शर्मा ने कहा ‘फिर शंभू के हलाहल का अनुरागी हो जाने दो, यौवन को फिर दयानंद जैसा त्यागी हो जाने दो’, पीयूष मालवीय ने कहा ‘सब गले पर चलाने लगे तलवार, हेमराज बोला एक काम कर लेने दो, सर मेरा काटते हो काट के ले जाओ पर, मुझे तिरंगे को प्रणाम कर लेने दो। लखनऊ की व्याख्या मिश्रा ने कहा ‘मेरी हर सांस तेरे नाम को दोहराएगी, मेरी हर सांसे तेरे प्यार को तलक जाएगी’। सौरभकांत शर्मा, अरुण जैमिणी, कुलदीप ललकार, रूपेश कुमार, अनुराधा शर्मा आदि ने भी काव्य पाठ किया।

एसडीएम भानु प्रताप यादव, विपिन भारतीय, राकेश गांगुली, नितिन गुप्ता, राजपाल सिंह, निशांत मित्तल, मेला चेयरमैन बालेंद्र सिंह, संयोजक गौरव विवेक, अनुज सिंघल, अशोक गुप्ता, वैभव अग्रवाल, पवन धीमान, डा. महेंद्र सैनी, कुणाल आदि मौजूद रहे। 
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