लखनौती। यमुना के खादर में जमीन पर कब्जे की होड़ किसानों के बीच खूनी संघर्ष की वजह बन रही है। यहां जमीन पर कब्जे को लेकर होने वाले संघर्षों में एक दशक में दर्जन भर कत्ल होने के बाद भी शासन और प्रशासन इस गंभीर समस्या के हल के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
नकुड़ तहसील तहसील के गंगोह क्षेत्र में यमुना खादर की जमीन की समस्याओं को सुलझाने के लिए 1976 में सरकार द्वारा दीक्षित एवार्ड बनाया गया था, लेकिन 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी इसमें केवल एक लेखपाल काम कर रहा है। जिसके चलते वर्षा ऋतु में यमुना में पानी चढ़ने के बाद पानी उतरने पर छोड़ी गई जमीन पर फसलें बोने और काटने के लिए संघर्ष हो जाते हैं।
शनिवार को ऐसी ही विवादित जमीन पर दो पक्षों के बीच संघर्ष में दो लोग अपनी जान गंवा बैठे। जबकि कइयों की जान पर बन आई। इससे पूर्व भी ऐसी यमुना के किनारे की जमीन पर हलवाना में तीन किसान, बल्ला मजरा के दो किसान, ज्ञानपुर माजरी की जमीन पर पांच लोगों की हत्या हो चुकी है। जबकि इन जमीनों को लेकर मारपीट की घटनाएं तो रोजमर्रा की बात है। यहां जमीन को लेकर सैकड़ों मुकदमे यूपी और हरियाणा के न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
नकुड़ एसडीएम शमशाद हुसैन का कहना है कि गांव कुंडा खुर्द की यह विवादित जमीन अभी चकबंदी सर्वे में है। सर्वे विभाग को रिपोर्ट भेजी गई है। उसके बाद ही बता पाना संभव होगा कि ये जमीन किसकी है। उनका कहना है कि वे सरकार को दीक्षित एवार्ड में स्टाफ बढ़ाने की रिपोर्ट भेजेंगे।
14 पर रिपोर्ट दर्ज
लखनौती। मृतक के पुत्र इसरार ने गांव के ही मुनव्वर, मुस्तफा, सरव्वर, मुस्तकीम, शौकीन, मोहसिन, अनवर, आकिब, इस्लाम, जमशेद, प्रवेश, गुलजार, पप्पू सहित कुल 14 लोगों के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है। इसके आधार पर पुलिस ने इन सभी लोगों के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला करने और बलवे की धाराओं मेें मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक मनोज तिवारी ने बताया कि तीन लोगों को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि बाकी लोगों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।