ग्राम तिड़फवा में एक परिवार को बंधक बनाकर एक लाख 70 हजार रुपये की लूट का मामला जांच में फर्जी निकला। पुलिस ने कथित पीड़ित के घर से ही रकम बरामद कर ली, जबकि अन्य कोई सामान लूट में जाना भी झूठा पाया गया। लोगों को उधार की रकम न लौटाने पड़े इसलिए परिवार ने लूट की वारदात का तानाबाना बुना था।
चिलकाना थाना क्षेत्र के गांव तिड़फवा में इकराम ने पुलिस में रिपार्ट दर्ज कराई थी कि बुधवार की रात चार बदमाश दीवार कूद कर घर में घुसे और उसके भाई कुरबान को गन प्वाइंट पर लेकर घर में रखे एक लाख 70 हजार रुपये तथा एक किलो चांदी के जेवर लूट लिए थे।
इकराम ने पुलिस को बताया था कि उसने 2.70 लाख रुपये के पापुलर के पेड़ बेचे थे, जिनमें से 1.70 लाख रुपये घर में रखे थे। मामले की जांच टोडरपुर पुलिस चौकी इंचार्ज संजीव यादव को सौंपी गई थी। यादव ने बताया कि घटना शुरू से ही संदिग्ध लग रही थी। पुलिस ने इकराम तथा उसके भाई कुरबान से सख्ती से बात की तो मामला खुलकर सामने आ गया।
पुलिस ने ग्राम प्रधान तुफैल अहमद को साथ लेकर इकराम के घर की तलाशी ली तो संदूक में रखे एक लाख 70 हजार रुपये बरामद हो गए। घर की हालत अच्छी न होने के कारण घर में जेवर नहीं थे। थाने में मौजूद इकराम ने बताया कि पापुलर के बिक्री से आए 2.70 लाख रुपये में से एक लाख रुपये अपने साले दिलशाद निवासी चुनेहटी को दे दिए थे। बाकी रकम 1.70 हजार रुपये लोगों की उधार देने थी।
किसी को पैसा न देना पड़े, इसी कारण भाई, पत्नी तथा भाभी के साथ मिलकर इकराम ने लूट का यह ड्रामा रचा था। उन्हें लगा था कि लूट होने के बाद उधारी वाले चुपचाप बैठ जाएंगे। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रवेज आलम ने बताया कि पुलिस को गुमराह करने के आरोप में रिपोर्ट लिखाने वाले इकराम के खिलाफ धारा 182 की कार्रवाई की जागी।