शब्बीरपुर में पुख्ता सूचना के बाद भी प्रशासन और पुलिस की चूक के चलते बवाल हुआ। शुक्रवार की सुबह ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के पास तनाव की खबर पहुंच गई थी। यहां तक सूचना मिल गई थी कि अगर शोभायात्रा शब्बीरपुर की ओर गई तो बड़ा बवाल हो जाएगा।
यह सूचना पहले बसपा नेताओं ने और बाद में ग्राम प्रधान ने चेतावनी भरे लहजे में पुलिस को दी थी। सूचनाओं के बाद भी अफसरों ने सतर्कता नहीं दिखाई और लापरवाही का रुख रखा। इतना ही नहीं, पथराव की पहली सूचना पर बड़गांव पुलिस के महज तीन सिपाही ही मौके पर पहुंचे थे। उधर, एसडीएम रामपुर ने इस पूरे बवाल का ठीकरा स्थानीय पुलिस पर फोड़ दिया है।
दरअसल, शुक्रवार की सुबह शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप जयंती के शोभायात्रा की खबर पहुंच गई थी। अंबेडकर जयंती पर शोभायात्रा नहीं निकाल पाने के गुस्से में बैठे दलित समाज के पास जैसे ही शुक्रवार के शोभायात्रा की खबर आई तो वे लामबंद होना शुरू हो गए। गांव के लोग एकत्र होकर ग्राम प्रधान के पास पहुंचे। ग्राम प्रधान शिवकुमार ने पहले बसपा नेताओें से बात की। बसपा जिलाध्यक्ष ने तत्काल इसकी सूचना एसडीएम रामपुर मनोज सिंह को दी और बताया कि गांव में काफी विरोध है।
इस मामले को गंभीरता से लेकर दिखवा लें। इसके बाद ग्राम प्रधान शिवकुमार ने चेतावनी भरे लहजे में पहले एसओ बड़गांव को और फिर एसडीएम को फोन किया और साफ शब्दों में कहा कि इन्हीं लोगों ने अंबेडकर जयंती की शोभायात्रा का विरोध किया था। अगर इनकी शोभायात्रा गांव में आई तो ठीक नहीं होगा।
बावजूद इसके पुलिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उधर, पुलिस की लापरवाही देखकर ग्राम प्रधान ने दलित समाज के लोगों को एकत्र कर उन्हें पूरी तरह से भड़का दिया। ग्राम प्रधान ने बाबा साहब की शपथ दिलाकर इस मामले में आर-पार की लड़ाई के लिए लोगों केे उकसाया। इसके बाद नौजवानों ने महाराणा प्रताप जयंती की शोभायात्रा पर पथराव तक की योजना बना ली। जैसे ही शोभायात्रा गांव में पहुंची तो उसे घेरकर हमला कर दिया गया।
उधर, एसडीएम रामपुर मनिहारन मनोज सिंह का कहना है कि इस बवाल की वजह पुलिस की लापरवाही रही है। मुझे सूचना मिली तो मैंने तत्काल ही एसओ बड़गांव को मौके पर जाने को कहा। मगर, वहां कोई नहीं गया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गया और फिर कई थानों की फोर्स को मौके पर भेजा।