पारिवारिक झगड़े में पुलिस ने शादी समारोह से मासूम को जबरन उठा लिया और बिना न्यायपीठ सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किए उसकी मां को सौंप दिया। शिकायत मिलने पर सीडब्ल्यूसी ने बागपत कोतवाली प्रभारी को बच्चे को तत्काल न्यायपीठ के सामने पेश करने के आदेश दिए हैं।
खेड़की गांव की एक वृद्धा ने न्यायपीठ बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के न्याय प्राधिकारी राजीव यादव, डॉ. कुलदीप त्यागी और मालती शर्मा को दिए शिकायती पत्र में बताया उसके बेटे की शादी बड़ौत निवासी एक युवती से हुई थी।
शादी के बाद उनके एक बेटा हुआ। इसके बाद दोनों में झगड़ा होने लगा तो पंचायत के सामने सहमति से दोनों का संबंध विच्छेद करा दिया। इस बीच पौत्र उनके पास ही रह रहा था। महिला ने दूसरी जगह अपनी शादी कर ली। इसके बाद वहां से भी उनका विवाद हो गया। उनका बेटा शराब पीता है।
उनके साथ झगड़ा करके कुछ दिन पहले फिर से अपनी पहली पत्नी के साथ जाकर रहने लगा। वृद्धा ने बताया उनका सात साल का पौत्र बड़ौत में अपनी बुआ के यहां शादी में गया हुआ था। तीन जुलाई को बागपत कोतवाली पुलिस एकाएक शादी समारोह में पहुंची और मासूम बच्चे को जबरन ले आई।
विरोध करने पर पुलिस ने परिजनों को धमकाया। पुलिस ने बच्चे को फिर से उसकी मां को सौंप दिया। इस शिकायत को न्याय पीठ ने गंभीरता से लिया। न्यायपीठ ने पुलिस को बच्चे को सीडब्ल्यूसी के सामने पेश करने का आदेश दिया। न्यायपीठ ने कहा पुलिस ने बिना सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किए बच्चा मां को सौंप दिया, यह किशोर न्याय अधिनियम 2015 का उल्लंघन है। पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होगी।