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बच्चा अगवा होने पर जमकर बवाल

Thu, 03 Mar 2016 01:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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सेना भर्ती रैली के मौके पर कड़ी सुरक्षा निगरानी के दावों के बीच बुधवार शाम खान आलमपुरा क्षेत्र में दो दुपहिया सवार युवकों ने भाई के गोद से तीन माह के बच्चे को अगवा कर लिया और फरार हो गए।
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दुपहिया सवार दूसरे बच्चे को भी अगवा करने के प्रयास में थे, मगर वह उनके चंगुल से बच गया। घटना के बाद परिवार के लोग और पड़ोसी पीछे भागे, मगर वे हाथ नहीं आए।

इस घटना से गुस्साए क्षेत्रवासियों ने पुलिस प्रशासन पर गुस्सा उतारते हुए सेना भर्ती रैली के रूट पर बुग्गियां डालकर करीब तीन घंटे तक जाम लगाया और जमकर हंगामा किया।
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सीओ और चार थानों की पुलिस ने पहुंचकर बमुश्किल लोगों को शांत किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ जमकर नोकझोंक भी हुई। एसएसपी आरपीएस यादव ने अगवा बच्चे को जल्द बरामद करने और हालात को नियंत्रण में रखने के निर्देश दिए हैं।

यह घटना बुधवार की शाम करीब पौने छह बजे की है। खान आलमपुरा क्षेत्र की घोसियो वाली गली के निवासी असलम का तीन माह का बच्चा असद और ताऊ के परिवार से भाई जुनैद गली के बाहर ही खेल रहे थे।

बताया जा रहा है कि यहां खड़े पेड़ से कुछ दूर आगे ही दुपहिया सवार युवक अचानक इन दोनों के पास पहुंचे और तीन माह के बच्चे को गोद से ही छीन लिया। दूसरे बच्चे को भी उठाने का प्रयास किया गया।

हालांकि सफल न होने पर दुपहिया सवार युवक घंटाघर की ओर जाते हुए फरार हो गए। घटना की भनक लगने पर परिजन और पड़ोस के लोग काफी दूर तक पीछे दौड़े मगर युवक हाथ नहीं आए।

घटना के विरोध में खानआलमपुरा क्षेत्र की कई कालोनियों के लोग इकट्ठा हो गए। पुलिस प्रशासन पर गुस्सा जाहिर करते हुए इन लोगों ने सेना भर्ती रैली के रूट पर बुग्गियां और अन्य अवरोधक डालकर जाम लगा दिया और जमकर हंगामा किया।

गुस्साए लोगों के जाम लगानेे के कारण घंटाघर की ओर एसएएम के पुल से लेकर सेना भर्ती वाले रूट पर स्थित थाना जनकपुरी तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालात बिगड़ते देख सीओ द्वितीय अमित कुमार नागर, थाना जनकपुरी प्रभारी यशपाल सिंह मौके पर पहुंचे।

हालांकि जब जाम नहीं खुल पाया तो बाद में नगर कोतवाली, कुतुबशेर और सदर पुलिस को भी बुलाया गया। नगर कोतवाल संजय पांडेय, सदर प्रभारी एसके दुबे ने भी जाम करने वालों को शांत करने की कोशिश की।

इस दौरान पुलिस को कई बार क्षेत्रवासियों के गुस्से का शिकार होना पड़ा और तीखी नोकझोंक हुई। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद यह जाम खोला जा सका।

पुलिस के सामने बड़बड़ाता रहा जुनैद ः घटना के दौरान जिस बच्चे जुनैद की गोद से असद को दुपहिया सवार छीनकर फरार हुए, वह पुलिस के सामने काफी देर तक बड़बड़ाता रहा।

पुलिस की टीमों ने जब दुपहिया सवारों के बारे में जानकारी चाही तो कभी एक्टिवा और कभी बाइक पर होने की बात कहने लगा। बच्चे के पास खड़ी बुआ रहमदी ने कहा कि युवक सुरमई रंग की गाड़ी पर सवार थे और घंटाघर की तरफ निकल गए।
अफसर का बेटा होता तो तुरंत ढूंढ देती पुलिस ः तीन माह के बच्चे असद के पिता असलम और परिवार के अन्य लोगों ने पुलिस पर रोष जताते हुए कहा कि वारदात थाने से कुछ मीटर की दूरी पर हुई है।

सेना भर्ती रैली में पुलिस टीमें काफी लगी हैं। इसके बावजूद उसके बच्चे को भरे बाजार उठा लिया गया। उसने कहा कि यदि यह बच्चा किसी अफसर का होता तो पुलिस कहीं से भी ढूंढ निकालती। कुछ लोगों ने बताया कि असलम गरीब परिवार से है। उसकी किसी से दुश्मनी तक नहीं। फिर उसके बच्चे को क्यों उठाया गया?

अरे...कहीं ये तांत्रिक से जुड़े तो नहीं ः परिवार की दो महिलाएं चीखते  हुए कहती रही कि बच्चा लेकर भागने वाले कहीं किसी तांत्रिक से तो जुड़े नहीं हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि बच्चे को बरामद न किया गया तो कहीं उसे वे मार न डालें।

बच्चे उठाने की पहेली में उलझी पुलिस ः दुपहिया सवारों ने तीन माह के बच्चे को क्यों उठाया? क्या यह रंजिश में हुआ या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह थी। परिवार की ही कुछ महिलाएं तो इस मामले में तांत्रिक से जुड़ी आशंकाएं तक जताती रहीं। फिलहाल दुपहिया सवारों के चंगुल से बचे बच्चे के सहारे ही पुलिस फरार होने वालों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

...तो बच जाता बच्चा
जाम खुलवाने के लिए जूझ रही पुलिस के कुछ जवान क्षेत्रवासियों से कहते रहे कि जितनी भीड़ ने यहां जाम लगा दिया है। यदि वह दुपहिया सवारों के पीछे लग जाती तो बच्चे को अगवा होने से बचाया जा सकता था।
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