डीएम के रिमाइंडर रिकवरी नोटिस जारी करने के बाद और भी मामले सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। यह भी माना जा रहा है कि पांच साल तक अवैध खनन पर प्रशासन की खामोशी का भी खुलासा होगा। उधर, न्यायालय के आदेश पर सीबीआई टीम ने भी प्रशासन की जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया है। ऐसे में अवैध खनन को शह देने वाले अफसरों पर शिकंजा कसेगा।
न्यायालय के आदेश पर अवैध खनन की सीबीआई जांच से ठीक पहले जिलाधिकारी पीके पांडेय ने 2012 से 2017 तक अवैध खनन के मामलों की समीक्षा कराई तो इसमें बड़ा खुलासा हुआ।
अवैध खनन की शिकायतों पर केवल चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया गया और ऐसे एक-दो नहीं बल्कि 437 मामले सामने आए। इसमें कई मामले ऐसे भी आए जिसमें नियमानुसार शमन शुल्क जमा कराकर उसके बाद अवैध खनन करने वालों पर पेनाल्टी लगाई जानी थी।
मगर, तत्कालीन जिलाधिकारियों ने उन मामलों में बिना किसी कार्रवाई के ही फाइल बंद कर दी गई। अब उन मामलों के खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ हेै। अब तक यह बात आती रही है कि अवैध खनन में रसूखवालों की संलिप्तता के चलते उनके खिलाफ किसी तरह की आवाज नहीं उठती थी।
मगर, डीएम की कार्रवाई के बाद अवैध खनन रने वालों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। डीएम पीके पांडेय ने बताया कि अवैध खनन को लेकर जांच और समीक्षा जारी है। लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सख्त कार्रवाई होगी।
सीबीआई की जांच में भी होगा खुलासा
न्यायालय के आदेश पर सहारनपुर में अवैध खनन की जांच के लिए सीबीआई टीम भी यहां आई थी। 12 दिनों तक जांच के दौरान सीबीआई टीम को महत्वपूर्ण तथ्य हाथ लगे थे। मौके पर जाकर सीबीआई टीम ने काफी सबूत एकत्र किया था। लोगों के बयान दर्ज किए थे। माना जा रहा है कि बड़े खुलासे हो सकते हैं।
बसपा एमएलसी सहित पट्टाधारकों से हुई थी पूछताछ
सीबीआई टीम ने पट्टाधारक बसपा एमएलसी महमूद अली सहित अन्य लोगों से पूछताछ की थी। सीबीआई टीम के लौटने के बाद अवैध खनन पर प्रशासनिक समीक्षा में पट्टाधारकों पर अवैध खनन की फाइल मिलने से हड़कंप मच गया था। अब रिकवरी नोटिस जारी होने के बाद उस दौरान तैनात अफसरों की मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है।