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बेलगाम हुए कैदी, बेबस है खाकी

Wed, 16 Mar 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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कुख्यात वाजिद के फरार होने की घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस फोर्स। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कचहरी मेें सिपाहियों के आंखों में मिर्च का पाउडर झोंक कर फरार बंदी का मामला अभी ठंडा ही नहीं पड़ा था कि बदमाशों ने एक बार दुस्साहसिक  ढंग से सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर पुलिस महकमे को खुली चुनौती दे डाली। मंगलवार को जेल में बंद कुख्यात मुकीम काला के शॉर्प शूटर वाजिद काला को भरी बस में सिपाहियों पर तमंचा तानकर हथियारों से लै
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स बदमाशों ने सरेआम छुड़ाने में कामयाब हो गए। लापरवाही की इंतहा है कि बेखौफ बदमाशों के इस वारदात के बाद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रह गई।

मंगलवार को सुबह करीब 8.30 बजे जेल से दो सिपाही बस द्वारा हिमाचल प्रदेश के विकास नगर पेशी पर ले गए थे वाजिद काला को। पुलिस के इकबाल का आलम यह था कि भरी बस में जैसे ही बदमाशों ने सिपाहियों पर तमंचा ताना तो मुकाबला करने की बजाय सिपाही सीट के नीचे छिप गए।

सबकी आंखों के सामने बदमाश काला को बाइक पर बैठाकर वहां से आसानी से फरार हो गए। जून 2013 में सरेआम सिपाही राहुल ढाका की हत्या मामले में आरोपी वाजिद सहारनपुर जेल में बंद था। लूट मामले में मंगलवार को इसकी विकास नगर में पेशी थी। मगर, पुलिस की लापरवाही का आलम यह था कि इस कुख्यात बदमाश की पेशी के लिए दो सिपाहियों को साथ भेजा गया और उन्हें बस से रवाना कर दिया गया।
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पुलिस की लचर रवैये का फायदा उठाते हुए बदमाशों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से पूरी वारदात को अंजाम दिया। विकास नगर से जिस बस में सिपाही वाजिद को लेकर चले थे, उसी में दो बदमाश वहां से चढ़ गए थे। इसके अलावा सहारनपुर की सीमा में प्रवेश करते हुए बाइक पर सवार बदमाशों ने बस का पीछा शुरू कर दिया था।

बदमाशों की योजना की पूरी जानकारी वाजिद को थी। इसलिए सही स्थान आने पर उसने उल्टी का बहाना किया और सिपाहियों से जूझ गया था। सबसे बड़ी बात यह है कि बदमाशों ने नौगजा पीर की पहाड़ियों के पास इस उसे छुड़ाया।

इससे साफ है कि उन्हें मालूम था कि यह जगह सुनसान है और यहां से पुलिस तक जानकारी काफी देर में पहुंचेगी। बता दें कि इस घटना ने एक बार फिर पुलिस के विश्वास पर सवाल खड़ा किया है।  

सिपाहियों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर फरार हुआ था बंदी
इससे पहले न्यायालय परिसर में दो सिपाहियों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर फरार हो गए थे। एक को मौके से पकड़ा गया था और दूसरे को असोम से गिरफ्तार किया गया। इस घटना के तुरंत बाद कुख्यात वाजिद के फरार होने से पुलिस को इकबाल को सीधी चुनौती है।

काम नहीं आई सरकारी रायफल
पेशी पर गए सिपाहियों के हाथ से बदमाश जब वाजिद को छुड़ा कर फरार हो रहे थे तब एक सिपाही ने उन पर फायर की कोशिश की, मगर सरकारी रायफल ने धोखा दे दिया। फायर मिस हो गया और बदमाश आगे निकल गए। हालांकि दूसरा फायर किया, तब तक बदमाश वहां से निकल चुके थे।



मुकीम और वाजिद काला का आतंक ः सहारनपुर। हथियारबंद बदमाशों की मदद से मंगलवार को पुलिस अभिरक्षा से भागने में कामयाब रहा कैदी वाजिद काला मुकीम गैंग का शॉर्प शूटर होने के साथ ही मुख्य सदस्य रहा है।

शहर के सदर थाना क्षेत्र में वर्ष 2013 में सिपाही राहुल ढाका हत्याकांड के अलावा सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर से लेकर हरियाणा के यमुनानगर, पानीपत और विकासनगर तक में लूट, डकैती और हत्याओं के मामलों में मुकीम गैंग के साथ वह सक्रिय रूप से शामिल रहा है। यह वर्ष 2013 से ही जिला कारागार में बंद था। 

शहर के गलीरा रोड पर विधायक रवींद्र मोल्हू की कोठी के सामने ही मुकीम काला के साथ वाजिद काला और अन्य बदमाश सीओ की मौजूदगी में ही सिपाही राहुल ढाका की हत्या करने के साथ ही कार्बाइन लूटकर फरार हो गए थे। बाद में तत्काल देहात कोतवाली प्रभारी राजेंद्र त्यागी सहित अन्य सदस्यों की टीम ने उसे गिरफ्तार किया था।

मुकीम गैंग का सदस्य था वाजिद ःपुलिस अफसरों के मुताबिक वाजिद काला मुकीम काला गैंग का काफी पुराना सदस्य था। यमुनानगर के घोड़ो पीपली में पेट्रोल पंप लूटकांड के बाद सिपाही राहुल ढाका हत्याकांड को अंजाम देने के बाद ही सहारनपुर पुलिस इस गैंग के पीछे पड़ी थी।

वर्ष 2013 में देहात कोतवाली पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने इस बदमाश को तब दबोच लिया था, जब वह अजीज कालोनी के एक मकान में छिपा हुआ था।

मुखबिरी के शक में मुनव्वर को मारी गई थी गोली
 वाजिद की गिरफ्तारी के बाद मुकीम गैंग को मुनव्वर भूरा बदमाश पर शक था कि उसकी मुखबिरी पर ही वाजिद काला पुलिस के हत्थे चढ़ा। इसी शक में मुनव्वर भूरा पर मुकीम ने गोली चलाई थी।

गंगोह के व्यापारियों में दो ही बदमाशों का बड़ा खौफ था। एक मुकीम काला खुद और दूसरा उसका अजीज  साथी वाजिद काला। लूट और डकैती के शिकार होने वाले कुछ व्यापारियों ने खुलासा किया था कि मुकीम धमकी देता था  तो वाजिद तमंचे लहराकर पैसे की मांग करते थे। जो बिना विरोध के बात मानते रहे, वे बच गए। बाकी लूट या डकैती के शिकार हो गए।
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