बेहट (सहारनपुर)। पूर्व एमएलसी और उनके बेटों सहित सात लोगों पर दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर एक बार फिर एमएलसी परिवार सामने आया है। उनका कहना है कि जिस जमीन को कब्जाने का मुकदमा दर्ज कराया गया है वह जमीन वर्ष 2012 में बेच दी गई थी। जमीन का बैनामा भी कर दिया गया, लेकिन दाखिल खारिज न होने की वजह से खसरा खतौनी में वादी का नाम ही चला आ रहा है, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
बता दें कि कुछ दिन पहले इलाके के गांव फतेहपुर निवासी पाल्ला ने मिर्जापुर थाने में पूर्व एमएलसी व ग्लोकल यूनिवर्सिटी के चांसलर हाजी इकबाल, वॉइस चांसलर वाजिद अली, पूर्व ब्लॉक प्रमुख राव लइक, मिर्जापुर ग्राम प्रधानपति जावेद इकबाल सहित सात लोगों के खिलाफ हथियारों के बल पर जमीन कब्जाने और जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले को लेकर एमएलसी महमूद अली व पूर्व ब्लॉक प्रमुख राव लईक ने बताया कि पाल्ला नाम के व्यक्ति की ओर से जिस जमीन पर कब्जा करने का मुकदमा दर्ज कराया गया था, उस जमीन को पाल्ला 2012 में देहरादून निवासी एक व्यक्ति को बेच चुका है। उन्होंने बताया कि पाल्ला के पिता साधूराम के नाम 7 बीघा जमीन थी। साधूराम की मौत के बाद साढ़े तीन बीघा जमीन पाल्ला तथा साढ़े तीन बीघा जमीन पाल्ला की मां सुरजी के नाम आ गई थी। सुरजी ने अपने हिस्से की जमीन 2013 में सतीश कुमार पुत्र हरिराम निवासी गांव फतेहउल्लापुर (जाटोवाला) थाना मिर्जापुर को बेच दी और उसका एग्रीमेंट कर दिया। पाल्ला ने भी अपने हिस्से की जमीन अवनीश कुमार पुत्र फूल सिंह निवासी 108-डीएल रोड देहरादून को 2012 में बेची थी। जिसका बैनामा भी करा दिया गया था एमएलसी महमूद अली का कहना है कि वे एसएसपी से मिलकर पूरा मामला बताएंगे। विपक्षी उन्हें बदनाम करने की साजिश रच रहा है।