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घोटाले की जांच में सामने आ सकते हैं सफेदपोशों के नाम

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सहारनपुर। जिला सहकारी बैंक में हुए छह करोड़ रुपये से ज्यादा के गबन का मामला सामने आने के बाद इससे जुड़े लोग अब अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। प्राथमिक जांच में ही शाखा प्रबंधक के अलावा कई सफेदपोशों का नाम आने की चर्चा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस घोटाले में कई और बैंक कर्मचारियों के अलावा राजनीतिक लोगों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बैंक के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से शक के दायरे में हैं। इसके अलावा जिले भर की 29 शाखाओं में इस तरह के मामले सामने आने की आशंका भी जताई जाने लगी है।
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दरअसल, सहकारी बैंक से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी अपने पीएफ (प्रोविडेंट फंड) की राशि इन शाखाओं में जमा कराते हैं। इसमें उन्हें सामान्य से एक फीसदी ज्यादा ब्याज मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि एकमुश्त जमा होने के कारण लोग तय समय तक इन पैसों की जानकारी नहीं करते। इसी का फायदा उठाकर इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया है।
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आखिर क्यों नहीं सामने घोटाला
आरोपी बैंक मैनेजर करीब आठ महीने पहले यहां स्थानांतरित होकर शारदा नगर ब्रांच गया था। नए मैनेजर ने पदभार ग्रहण करने के दौरान भी एफडीआर की जांच नहीं की। जबकि लोन के एफडीआर की जांच उस समय होनी चाहिए। इसके अलावा ऑडिट, इंटरनल ऑडिट और सीए की जांच में यह घोटाला सामने नहीं आया। ऐसे में बड़े पदों पर बैठे अफसरों पर भी उंगली उठ रही है। सहारनपुर में जिला सहकारी बैंक की 29 शाखाएं हैं। उन शाखाओं में ऐसी ही गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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मंत्री की रिश्तेदार की आईडी का हुआ है प्रयोग
जिला सहकारी बैंक की सायंकालीन शाखा में गबन की जांच में एक मंत्री की एक रिश्तेदार की भूमिका सामने आ रही है। कई लोन की रिक्वेस्ट उसी की आईडी से की गई है। हालांकि अभी अधिकारी इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं है। जिला सहकारी बैंक में तैनात ज्यादातर कर्मचारी राजनीतिक दलों के नेताओं के रिश्तेदार हैं। यही कारण है कि यहां होने वाली गड़बड़ियों को दबा दिया जाता है या दोषियों को बचा लिया जाता है।
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जांच में सामने आएगी बात
इस पूरे प्रकरण ने तमाम आशंकाओं को सामने रखा है। हम पूरी जांच के बाद ही कुछ कह पाएंगे और तभी सही बात सामने आएगी। फिलहाल जांच कमेटी गठित की गई है।
एके सिंह, उपमहाप्रबंधक, जिला सहकारी बैंक
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बिना एफडीआर के किए गए लोन
नाम-------------लोन की राशि
एलएल दोहरे-----27,92,259
एसी सक्सेना---5,13,158
अवधेश नारायण मिश्र--14,64,824
मनवीर सिंह----11,30,598 और 10,68,379
संतोष पुंडीर---18,35,248 व 4,06,829 व 3,34,860
सुदेश बंसल---29,09,437
लाभ सिंह---5,54,437 व 6,17,176 व 54,822
इंपलाई प्राविडेंट फंड---1, 11,27,619
एमपी सिंह--13,74,089
जेपी यादव--10,34,082
धमेन्द्र प्रताप अग्रवाल---20, 45,438
सुशीला---6,34,742 और 25,99,979
श्वेता शुक्ला----7,32,412
पंकज मोहन---23,05,591
आशीष यादव--3,16,636
उदयवीर सिंह-1154913-1105895
पुष्पा----2429290
दिनेश चंद्र----676394
शियापाल----1088314
मांगेराम----584636 और 430776
दर्शन लाल----2462876
सिगरेट वर्क्स कोआपरेटिव---1746152
स्वाति कपिल----366018
भूपेन्द्र कुमार---105836
भूपेन्द्र कौर-----529876
रमनीत कौर----529876
मधू-----1387466
उषा सिंह---991186
दिव्या पुंडीर----242494
सुनीता शर्मा---215679
अरबन कोआपरेटिव बैंक--9189238
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कुल निकाली गई राशि----61092572
--नोट- धनराशि लाख में है
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