पुलिस ने बैंक अधिकारी के पास से बरामद किए 29 लाख
सहारनपुर। भूमि अध्याप्ति अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर फर्जी चेक बनाकर किए गए चार करोड़ रुपये से अधिक के गबन के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किए गए बैंक अधिकारी गौरव गर्ग के पास से 29 लाख रुपये बरामद कर लिए हैं। जबकि आसिफ के पास से पुलिस ने 20 हजार रुपये बरामद किए हैं।
मुजफ्फरनगर की इंडसइंड बैंक में खोले गए एनएचएआई के खाते से फर्जी चेक बनाकर सहारनपुर के भूमि अध्याप्ति अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करके चार करोड़ रुपये से अधिक रुपये का गबन किया। जिसमें पुलिस ने मुंबई से चार लोगों को गिरफ्तार कर 7.02 लाख रुपये बरामद किए थे। पुलिस ने मुजफ्फरनगर की इंडसइंड बैंक के कस्टमर सर्विस मैनेजर गौरव गर्ग तथा उनके चालक आसिफ को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गौरव गर्ग और आसिफ से पूछताछ की और गौरव गर्ग की निशानदेही पर पुलिस ने मुजफ्फरनगर स्थित उसके आवास एवं अन्य दो स्थानों से 29 लाख रुपये की बरामदगी की। पुलिस ने आसिफ के पास से 20 हजार रुपये मिले। अब तक पुलिस कुल 36.22 लाख रुपये बरामद कर चुकी है। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए बैंक अधिकारी गौरव गर्ग एवं आसिफ को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
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--। मासूम से सामना होते ही गौरव ने बता दी गबन की कहानी
पुलिस एक सप्ताह से इंडसइंड बैंक मुजफ्फरनगर के शाखा प्रबंधक अमन जैन एवं कस्टमर सर्विस मैनेजर गौरव गर्ग से एक सप्ताह तक हिरासत में लेकर पूछताछ की। लेकिन गौरव ने इस मामले में अपनी किसी भी प्रकार की भूमिका से इंकार कर दिया। लेकिन मंगलवार को पुलिस मुंबई से गिरफ्तार करके चार आरोपियों को लेकर कोतवाली पहुंची और बैंक अधिकारियों का आमना-सामना कराया तो मासूम अली उर्फ अनवर अली को सामने देखते ही गौरव गर्ग के होश उड़ गए। उसके बाद तो वह टूट गया और फिर गबन की पूरी कहानी पुलिस के सामने रख दी।
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--। सुनील चेक बनवाता था, पारस पैसे निकलवाता था
सहारनपुर। मुंबई से संचालित रैकेट में शामिल सुनील सोनी मुंबई में नकली चेक तैयार करवाता था और मासूम अली उर्फ अनवार अली के माध्यम से सहारनपुर की इंडसइंड बैंक में चेक जमा कराता था, जबकि पैसा निकालने की जिम्मेदारी पारस पखवाना पर थी। जो पैसे निकलने के बाद सभी को उनका हिस्सा भिजवा देता था।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने बताया कि एक चेन की तरह पूरा रैकेट काम कर रहा था। मुजफ्फरनगर की इंडसइंड बैंक का कस्टमर सर्विस मैनेजर गौरव गर्ग का बैंक से असली चेक का फोटो मासूम अली उर्फ अनवार अली को उपलब्ध कराता था। मासूम अली उसे मुंबई में ओमप्रकाश श्रीवास्तव को भेजता था, ओमप्रकाश उसे सुनील सोनी को भेजता था। मुंबई में सुनील सोनी किसी दादा एवं आरके नाम के व्यक्तियों से फोटो से चेक बनवाता और उस पर हस्ताक्षर कराता था। चेक जिस खाता में जमा करना होता था, उसका नाम पारस पखवाना नाम का व्यक्ति बताता था। पारस पखवाना का पता कर्नाटक अथवा पश्चिमी बंगाल बताया जा रहा है। पारस पखवाना ने ही पंकज सिंह, निमेष जैन, पवन कुमार जैन, दिव्यांग गांधी समेत कई नामों के खाते खुलवा रखे थे। इन्ही नामों से चेक तैयार कराए जाते थे।
सुनील सोनी नाम पूछकर चेक तैयार कराता था, जिसे ओमप्रकाश को उपलब्ध कराता था। ओमप्रकाश श्रीवास्तव हवाई जहाज से चेक मासूम अली के पास पहुंचता था। मासूम अली भी स्वयं बैंक न जाकर आसिफ और सलमान के माध्यम से चेक बैंक में जमा कराता। चेक पास होने के बाद पारस पखवाना और पंकज सिंह कैश निकालते और ओमप्रकाश के पास पहुंचाते। ओमप्रकाश चेक की तरह सभी को कमीशन पहुंचवाता था।
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--। एक शख्स तीसरे को नहीं जानता था
पुलिस के अनुसार अभी तक रैकेट के मात्र छह लोग ही गिरफ्तार किए जा सके हैं। जबकि अभी इसमें एक दर्जन लोगों के और शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। जो पूरी एक चेन की तरह काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार इस चेन में न तो किसी ने एक दूसरे को अपना नाम ही सही बताया था और न ही पहला व्यक्ति तीसरे अथवा चौथे व्यक्ति को जानता था। गौरव गर्ग सिर्फ मासूम को जानता था। न तो सुनील सोनी को जानता था और न ही पारस पखवाना को। मासूम अली भी सिर्फ ओम प्रकाश को ही जानता था, चेक कौन तैयार कराता है उसका नाम मासूम को नहीं पता था। न ही उसे यह पता था कि भुगतान कौन निकाल रहा है। ओमप्रकाश ही एकमात्र व्यक्ति है, जिसे सभी के बारे में जानकारी थी। पुलिस अभी सुनील सोनी, दादा एवं आरके नाम के व्यक्तियों, पारस पखवाना, पंकज एवं खाता धारकों की तलाश कर रही है।
--। चार करोड़ में से अब तक सिर्फ 36.22 लाख मिले
एनएचएआई के खाते से चार करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ। जिसमें से पुलिस अभी तक मात्र 36.22 लाख रुपये ही बरामद कर सकी है। पुलिस ने मुंबई से पकड़े गए चार आरोपियों से 7.02 लाख रुपये बरामद किए थे। गौरव गर्ग की निशानदेही पर पुलिस ने 29 लाख रुपये बरामद किए, जबकि आसिफ की निशानदेही पर 20 हजार रुपये बरामद किए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि रैकेट में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बाद और भी धनराशि बरामद होगी।