सहारनपुर। विवादों में घिरी रॉयल पाम कॉलोनी में प्राधिकरण ने भारी अनियमितता पाए जाने पर बड़ी कार्रवाई की है। बृहस्पतिवार को विकास प्राधिकरण ने जांच रिपोर्ट के आधार पर तिरुपति गार्डन और रॉयल पाम का मानचित्र निरस्त कर दिया है। उधर, एसडीए की इस कार्रवाई के बाद कॉलोनी के प्लाट होल्डर्स और निवेशकों में हड़कंप मच गया है। फिलहाल आनन-फानन में विकास प्राधिकरण की कार्रवाई को पुलिस में दर्ज मामले और कार्रवाई से आरोपी अधिकारियों के बचाव के रुप में देखा जा रहा है। उधर, जेल में बंद कॉलोनाइजर सुशील गाबा के पार्टनर पर पुलिस शिकंजा कसने की तैयारी में है।
रॉयल पाम कॉलोनी के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आने के बाद विकास प्राधिकरण ने पूरे मामले की जांच कराई तो बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विकास प्राधिकरण में 17 जून 2015 को प्रवीण गाबा, ललित पोपली, अजय कुमार, कुलदीप कुमार और सुशील गाबा ने तलपट मानचित्र प्रस्तुत किया। इनकी ओर से प्राधिकरण कोष में पोस्ट डेटेड चेक जमा किया गया, मगर वह चेक बाउंस हो गया। प्राधिकरण की जांच में यह भी बात सामने आई कि स्वीकृत मानचित्र में अंकित नियम और शर्तो का पालन नहीं किया गया। स्वामित्व विवाद उजागर होने के बाद प्राधिकरण की ओर से स्वीकृत मानचित्र और पहले स्वीकृत मानचित्र में दिए गए भूमि के खसरों में भिन्नता पाई गई। इसके अलावा बंधक प्लॉटों को बेचे जाने सहित कई और अनियमितता पाए जाने पर विकास प्राधिकरण ने मानचित्र को निरस्त कर दिया। प्राधिकरण की इस कार्रवाई के बाद कालोनी में प्लाट होल्डर्स में भी हड़कंप मच गया है।
प्राधिकरण और पुलिस भी है आमने-सामने
रॉयल पाम मामले में विकास प्राधिकरण और पुलिस भी आमने-सामने है। इस फर्जीवाड़े में पुलिस ने राहुल गोयल की तहरीर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और आरोपी सुशील गाबा को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं और उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। इसके बाद विकास प्राधिकरण ने अपनी जांच रिपोर्ट में सुशील गाबा और उनके पार्टनर को लगभग क्लीन चिट देते हुए मुकदमा दर्ज कराने वाले पक्ष पर ही सभी आरोप मढ़ने में जुटा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि रॉयल पाम का नक्शा स्वीकृत करने वाले कई अधिकारी अब भी यहां तैनात हैं। यही कारण है कि इस मामले में विकास प्राधिकरण और पुलिस भी आमने-सामने नजर आ रही है।
गाबा के पार्टनर्स पर भी कसेगा शिकंजा
रॉयल पॉम कालोनी में सुशील गाबा उसके भाई प्रवीन गाबा और एक आर्किटेक्ट मनमीत बजाज के खिलाफ 2015 में एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। तभी से तीनों आरोपी फरार चल रहे थे। 22 अक्तूबर को क्राइम ब्रांच के निरीक्षक दीपक चतुर्वेदी ने सुशील गाबा को विश्वकर्मा चौक से गिरफ्तार कर लिया। जिसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया था। पुलिस इस मामले विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और गाबा के पार्टनर पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस पूरी धोखाधड़ी में इनकी भी भूमिका है। ऐसे में प्राधिकरण के अधिकारी और गाबा के पार्टनर अपने बचाव में भी जुटे हैं।
अनियमितता और नियमों का पालन नहीं करने के चलते रॉयल पाम का नक्शा निरस्त कर दिया गया है। इस मामले में जांच कराकर इसकी रिपोर्ट भी उच्चस्थ अधिकारियों को भेजी गई है। रॉयल पॉल और पूर्व स्वीकृत तिरुपति गार्डन दोनों के नक्शे निरस्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।
मनोज कुमार, उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण
इस धोखाधड़ी की जांच जारी है और इसमें जिनकी भूमिका सामने आएगी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कुछ तथ्य पुलिस को मिले हैं और उन्हीं के आधार पर पड़ताल हो रही है।
बबलू कुमार, एसएसपी