पांच माह में बना था आतंकी अब्दुल्ला का पासपोर्ट
देवबंद (सहारनपुर)। आतंकवादी निरोधक दस्ता (एटीएस) द्वारा कुटेसरा से गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मामून का पासपोर्ट करीब पांच महीने पहले ही बना था, जबकि वह पिछले करीब छह सालों से बिना पासपोर्ट ही भारत में रह रहा था।
मुजफ्फरनगर के कुटेसरा गांव से गिरफ्तार किया गया बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मामून वर्ष 2011 से भारत में बिना पासपोर्ट के ही रह रहा था। हालांकि सूत्रों की माने तो अब्दुल्ला ने अंबहेटा शेखां के पते पर तैयार फर्जी दस्तावेज के आधार पर पहले ही पासपोर्ट बनवा लिया था, लेकिन स्थानीय अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। जिसके बाद फरवरी 2017 में उसने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था, जबकि सभी जांच होने के बाद 17 जून 2017 को उसका पासपोर्ट तैयार हो गया। पासपोर्ट की पूरी प्रक्रिया में खास बात यह है कि खुफिया विभाग से लेकर पुलिस अधिकारियों तक को अब्दुल्ला और उसके दस्तावेजों पर जरा भी शक नहीं हुआ और ठेके के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाए गए पासपोर्ट की इंक्वायरी आसानी से होती चली गई। पासपोर्ट तैयार होने के बाद आतंकी अब्दुल्ला बेफिक्र हो गया और पहले अंबहेटा शेखां और उसके बाद वह कुटेसरा की मस्जिद में इमामत करने लगा। इस दौरान उसने देवबंद मदरसे में भी प्रवेश लेने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। अब्दुल्ला का पासपोर्ट बनने के मामले में यूपी एटीएस ने जांच के आदेश दिए हैं। जिसमें अब्दुल्ला का पासपोर्ट बनने की अवधि के दौरान यहां तैनात रहे अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।