देवबंद (सहारनपुर)। गबन के पूर्व प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी को 13 जनवरी तक जमानत लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही न्यायालय को प्रकरण में एक वर्ष में सुनवाई पूरी करने को निर्देशित किए जाने से पालिकाध्यक्ष खेमे में हड़कंप मच हुआ है।
नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी के पहले के कार्यकाल में हुए फर्जी बिलिंग प्रकरण का जिन्न फिर से बाहर निकल गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पालिकाध्यक्ष को प्रकरण में 13 जनवरी तक जमानत कराए जाने को कहा है। प्रकरण में पिछले एक दशक से अधिक समय से स्टे चल रहा है। वर्ष 2005 में जियाउद्दीन अंसारी के खिलाफ एक वाद दायर किया गया था। जिसमें उन्हें वर्ष 2004 में हुई फर्जी बिलिंग प्रकरण में धारा 420, 419, 467, 468, 471 का आरोपी बनाया गया था। जिसमें आरोप लगा था जियाउद्दीन अंसारी ने फर्जी फर्म तैयार कर फर्म के नाम से 2 लाख 98 हजार रुपये का भुगतान करा लिया था। जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचा था। नवंबर माह में जियाउद्दीन अंसारी गैर जमानती वारंट को स्टे कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे। जहां कोर्ट ने उन्हें 13 जनवरी तक न्यायालय में पेश होकर जमानत कराने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने वाद की सुनवाई कर रहे न्यायालय को एक साल के भीतर सुनवाई करने का आदेश दिया है। फर्जी बिलिंग का मामला फिर से खुलने को लेकर विपक्षी खेमा बेहद उत्साहित है और वह पालिकाध्यक्ष को इसमें सजा मिलने की बात कर रहा है। चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी का कहना है कि यह उनके खिलाफ षड्यंत्र हैं जिसे वह पूर्व की भांति निपटा लेंगे।