सहारनपुर। फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए विदेशी नागरिक देवबंद में पनाह लेते रहे हैं। एक बार नहीं इसका बार-बार खुलासा हो रहा है। पुलिस एक साल में फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में तीन लोगों को पकड़ लिया है। खुफिया एजेंसी अब नए सिरे से पासपोर्ट का सत्यापन कराने की तैयारी में है। देवबंद में फर्जी पासपोर्ट के जरिये बांग्लादेशी आतंकी पहले भी पनाह लेते रहे हैं। पिछले साल छह अगस्त को एटीएस ने चरथावल के ग्राम कुटेसरा की मस्जिद से बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसारुल्ला बांग्लाटीम के सदस्य अब्दुल्लाह-अल-मामून को गिरफ्तार कर देवबंद में फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का खुलासा किया था। अब्दुल्लाह कई साल से देवबंद के अंबेहटा शेख में रहा। यहीं से उसके द्वारा फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट बनवाया गया था, जबकि फर्जी पासपोर्ट बनाने का आरोपी बांग्लादेशी आतंकी संगठन से ही जुड़ा फैजान अहमद आज तक फरार चल रहा है।
मुरादनगर में रह रहे यूसुफ नाम के बांग्लादेशी ने भी देवबंद से फर्जी पासपोर्ट बनवा लिया था। फर्जी पासपोर्ट बनाने के आरोप में एटीएस ने जनवरी में देवबंद निवासी अहसान अहमद और वसीम अहमद को गिरफ्तार भी किया था। अक्तूबर में ही दिल्ली से कोलकाता पुलिस ने भी बांग्लादेशी आतंकी रजाउल रहमान को गिरफ्तार किया था, जो देवबंद में काफी समय से रह रहा था। उसके बाद सितंबर में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से तीन बांग्लादेशी आतंकियों को एटीएस ने गिरफ्तार किया। जिनमें इमरान, रजीजुद्दीन और मोहम्मद फिरदौस शामिल थे। तीनों देवबंद के ग्राम भनेड़ा में काफी समय से रह रहे थे। इससे पूर्व 2016 में एटीएस ने देवबंद से ही जैस ए मोहम्मद के चार आतंकियों को गिरफ्तार किया था। हाल में ही 19 मई को पुलिस ने देवबंद के एक मकान से म्यांमार निवासी जुनैद को गिरफ्तार किया। जिसने फर्जी पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। खुफिया विभाग की टीम पहुंची तो किराए के मकान को उसने अपना मकान बताया और जन्म से देवंबद में रहना बताया। जबकि वह कुछ वर्ष पूर्व शरणार्थी के रूप से म्यांमार से भारत पहुंचा था।
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मुंशी पर गिर चुकी है गाज
देवबंद। फर्जी पासपोर्ट के मामले में कोतवाली का एक मुंशी पहले ही लाइन हाजिर हो चुका है। सामने आया था कि पैसे के लालच में भौतिक सत्यापन किए बिना ही जांच कर दी गई। यही नहीं रिपोर्ट पर चौकी इंचार्ज की फर्जी मोहर लगा दी थी।