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पूरे वर्ष छाया रहा अवैध खनन का मुद्दा--

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सहारनपुर। जिले में वर्ष 2017 में अवैध खनन का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा। एनजीटी के खनन पर रोक लगाने के बाद सीबीआई टीम ने यहां आकर जांच की तो हड़कंप मच गया। विधानसभा और निकाय चुनाव में खनन बंदी को लेकर राजनीतिक घमासान चरम पर रहा।
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खनन बंद होने की वजह से वर्ष 2017 में तमाम विकास कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहा। एनजीटी की रोक के बावजूद अवैध खनन होने के मामले भी सामने आते रहे। इसी का फायदा विधानसभा चुनाव से पूर्व राजनीतिक दलों ने उठाया और चुनाव प्रचार के दौरान खनन मुद्दे पर मतदाताओं को रिझाने का पूरा प्रयास किया। इसमें राजनीतिक दल सफल भी हुए। सीबीआई ने जुलाई में सहारनपुर आकर अवैध खनन की जांच की तो सरकारी तंत्र में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने आनन-फानन में बसपा एमएलसी महमूद अली सहित करीब 350 स्टोन क्रशर संचालकों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगा दिया, लेकिन पूरे वर्ष जुुर्माने की रकम प्रशासन नहीं वसूल पाया। नवंबर माह में हुए निकाय चुनाव में भी खनन बंदी को लेकर राजनीतिक घमासान मचा रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की रैली में भी खनन का मुद्दा जोरशोर से उठा।
उधर, रोक के बावजूद अवैध खनन होता रहा। कृषि व प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अचानक बेहट क्षेत्र की खनन बेल्ट में छापा मारकर अवैध खनन होते हुए पकड़ा। इसकी गूंज लखनऊ तक पहुंची तो अफसरों ने तत्कालीन कोतवाली बेहट इंस्पेक्टर सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। दिसंबर माह में खनन बंदी का मुद्दा बसपा एमएलसी महमूद अली ने विधान परिषद में उठाया। इसको लेकर साल के अंत में एक बार फिर सियासी घमासान मच गया। खनन चालू कराने के लिए एनजीटी कोर्ट में सुनवाई चल रही है, लेकिन चार माह से सुनवाई के लिए तारीखें लगती रही। लोगों को उम्मीद रही कि 2017 में ही खनन खुल जाए, लेकिन ऐसा ना होने की वजह जनपदवासियों के हाथ मायूसी लगी। अब लोगों को आशा है कि नए वर्ष 2018 में खनन पर लगी रोक हट जाएगी।
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प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक
सहारनपुर। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन की रफ्तार पर खनन बंद होने से ब्रेक लग गया। जनपद के 887 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने का लक्ष्य शासन ने अक्टूबर 2018 तक रखा है, लेकिन प्रशासन साढ़े तीन साल में 230 गांवों को ही ओडीएफ घोषित कर पाया। अब दस माह का समय बचा है और सैकड़ों गांव में डेढ़ लाख शौचालय बनाए जाने हैं।
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भाजपा के लिए मुफीद रहा 2017
सहारनपुर। वर्ष 2017 भाजपा के लिए मुफीद रहा। विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा नेताओं ने मां शाकंभरी देवी के दर्शन कर परिवर्तन यात्रा की शुरूआत की। मतगणना वाले दिन पूरे प्रदेश में सबसे पहली सीट भाजपा ने सहारनपुर से जीती। इसके बाद जीत सिलसिला प्रदेश में 325 सीटों पर जाकर रूका। भाजपा ने चुुनाव के दौरान खनन का मुद्दा उठाए रखा। इसका फायदा भी भाजपा को हुआ। निकाय चुनाव से पूर्व सहारनपुर आए सीएम योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने खनन बंदी का जिम्मेदार सपा और बसपा को ठहराया। साल के अंत में नवंबर माह में हुए निकाय चुनाव में भाजपा सहारनपुर सहित प्रदेश की 16 महापौर सीटों पर कब्जा किया।
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