सहारनपुर। सॉल्वर गैंग के सदस्य परीक्षार्थियों से बदले में परीक्षा देने के लिए प्रत्येक से पांच लाख रुपये से दस लाख रुपये तक वसूलते थे। पकड़े गए आरोपियों ने भी परीक्षार्थियों से 50 हजार रुपये की अग्रिम धनराशि ले रखी थी, जबकि आठ लाख रुपये परीक्षा के बाद तय किए गए थे।
शुक्रवार को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद संवर्ग प्रतियोगात्मक परीक्षा 2018 का आयोजन किया गया। एसटीएफ ने दूसरे के स्थान पर परीक्षा दे रहे तीन लोगों एवं पेपर साल्व करा रहे तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ नोएडा यूनिट के डीएसपी विनोद सिरोही ने बताया कि पकड़े गए सॉल्वर गैंग के सदस्यों ने बताया कि परीक्षार्थियों से परीक्षा सॉल्व कराने एवं उनके स्थान पर दूसरे व्यक्ति से परीक्षा दिलाने के बदले में पांच से दस लाख रुपये तक वसूलते थे। इसका 50 प्रतिशत हिस्सा सॉल्वर को जाता था, जबकि शेष मैनेज कराने वालों में बंटता था। इन तीन परीक्षार्थियों से 50-50 हजार रुपये एडवांस ले लिए गए थे, जबकि आठ लाख रुपये परीक्षा दिए जाने से लेकर पास होने तक तय हुआ था। कुछ रुपये परीक्षा दिए जाने के बाद और शेष रकम पास होने के बाद दी जानी थी। इससे पहले ही आरोपी दबोच लिए गए।
शर्ट के कफ में लगाई स्पीकर डिवाइस, कान में ईयर डिवाइस
एसटीएफ के डीएसपी विनोद सिरोही ने बताया कि गौरव कुमार और राहुल रेलवे रोड स्थित अमनदीप होटल में रुके हुए थे। वहीं से पेपर साल्व करा रहे थे। दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने वालों को एक इलेक्ट्रानिक चिप एवं एक बहुत छोटी ईयर डिवाइस दी गई थी। इलेक्ट्रॉनिक चिप को शर्ट की बाजू के कफ में चिपका कर छुपाया गया था, जबकि ईयर डिवाइस एक मोती की तरह थी, जिसे कान में बड़ी सावधानी से छिपा लिया गया था। किसी को भी संदेह नहीं हो पाया था कि सॉल्वर गैंग के सदस्य हैं।
कोचिंग सेंटर संचालक से संजीव बना सॉल्वर
एसटीएफ नोएडा यूनिट के पुलिस उपाधीक्षक राजकुमार ने बताया कि मुख्य आरोपी संजीव कुमार सरोहा निवासी ग्राम शेरपुर लुहारा, थाना छपरौली, बागपत अग्रवाल मंडी टटीरी में अपना कोचिंग सेंटर चलाता था। संजीव ने बताया कि उसने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से स्नातक की पढ़ाई की है। वर्ष 2010-11 में एसएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली में रेनबो कोचिंग सेंटर दुर्गापुरी में दाखिला लिया था। सफल न होने पर उसने स्वयं का सरस्वती कोचिंग सेंटर अग्रवाल मंडी टटीरी बागपत में खोला। जहां पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने लगा। कोचिंग सेंटर में लाभ न होने पर लगभग दो वर्ष पूर्व उसने कोचिंग सेंटर को बंद कर दिया। इसके बाद वह सोनू निवासी बड़ौत, बागपत के संपर्क में आया। सोनू ने संजीव के कोचिंग सेंटर में कोचिंग की थी। जिस कारण उनकी जान पहचान थी। सोनू ने ही संजीव को डिवाइस लगाकर सॉल्वर बनने के लिए तैयार किया।
दिल्ली के जनकपुरी से खरीदी थी एक लाख रुपये की डिवाइस
एसटीएफ नोएडा यूनिट के उपाधीक्षक राजकुमार ने बताया कि मुख्य आरोपी संजीव कुमार ने सॉल्वर बनने के लिए काफी समय तक डिवाइसों के बारे में जानकारी ली। उसने पूरी विधि को समझा, इसके बाद सबसे पहले उसने डिवाइस का इस्तेमाल कर वास्तविक अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा सेंटर में सॉल्वर भेजने की तैयारी की। वह सोनू के साथ ही दिल्ली के जनकपुरी मेट्रो स्टेशन में एक दुकान पर गया और वहां से ईयर पीस एवं रिसीविंग डिवाइस मशीनें खरीदीं। जिनकी कीमत लगभग नौ हजार रुपये प्रति मशीन थी।
यू-ट्यूब से सीखी थी थंब इंप्रेशन बनाने की विधि
एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि संजीव ने फर्जी प्रवेश पत्र कंप्यूटर से तैयार किए थे, जबकि फेवीकोल से थंब इंप्रेशन बनाया था। संजीव ने एसटीएफ को बताया कि उसने थंब इंप्रेशन बनाने की विधि यू-ट्यूब से सीखी थी। जिसके बाद उसने थंब इंप्रेशन बनाकर सॉल्वर को दिए और परीक्षा के दौरान उन्हें पकड़ा नहीं जा सका।
दूसरी पाली में भी सॉल्वर बैठाने के लिए ले रखे थे पैसे
एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार दूसरी पाली में सॉल्वर बैठाने के लिए भी पैसे लिए गए थे। इन्हीं सॉल्वर से दूसरी पाली में भी परीक्षा दिलाई जानी थी, लेकिन एसटीएफ ने इनको सुबह की पाली में ही दबोच लिया। जिस कारण दूसरी पाली में परीक्षा नहीं दिला सके। एसटीएफ दूसरी पाली के परीक्षार्थियों के बारे में पूछताछ कर रही है।
एक दिन पहले ही मिल गई थी एसटीएफ को जानकारी
एसटीएफ को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद संवर्ग प्रतियोगात्मक परीक्षा 2018में सॉल्वर गैंग के बारे में पहले ही जानकारी हो गई थी। फोन पर हुई बातों को एसटीएफ ने ट्रेस कर लिया था। जिसके बाद से उनका लगातार फोन कॉल पर नजर रखी जा रही थी। सॉल्वर गैंग भी एक दिन पहले सहारनपुर पहुंच गया था और एसटीएफ की टीम भी बुधवार को ही सहारनपुर पहुंच गई थी।