फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मदरसा घोटाले में शासन को रिपोर्ट भेजी, नहीं हुई एफआईआर

विज्ञापन
विज्ञापन
मदरसा घोटाले में शासन को रिपोर्ट भेजी, नहीं हुई एफआईआर
विज्ञापन

सहारनपुर। मदरसे के नाम पर 58 लाख का घोटाला करने के मामले में जांच पूरी हुए एक माह बीत गया है। जांच में सामने आ चुका कि सुनियोजित तरीके से मिलीभगत कर सरकारी धन की बंदरबांट की गई। इस मामले में विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी फंस रहे हैं, लेकिन घोटाला करने वालों के खिलाफ एफआईआर नहीं कराई गई है। कार्रवाई के लिए विभाग ने शासन के पाले में गेंद डाल दी है।
बेहट क्षेत्र के बादशाही बाग में कादरिया उल उलमा एंग्लो मदरसा संचालित होना दिखाया गया था। इसमें बच्चों का दाखिला और हॉस्टल होना भी बताया गया। शिकायत पर मंडलायुक्त के निर्देशानुसार मदरसे की जांच की गई। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मौके पर जाकर देखा तो कोई मदरसा संचालित होता नहीं मिला। जिस व्यक्ति के नाम यह मदरसा संचालित हो रहा था। उसने उच्चाधिकारियों को शपथ पत्र देकर बताया कि वर्ष 2012 में मदरसा बंद कर दिया था। लेकिन इसके बाद भी कागजों में मदरसा संचालित होता रहा। वर्ष 2016 और 2017 में छात्रवृत्ति के नाम पर सरकार से प्राप्त 58 लाख रुपये की बंदरबांट हुई।
विज्ञापन

इस मामले की जांच पूरी हुए एक माह बीत गया है। फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों के नाम भी सामने आ चुके हैं। जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ जल्द एफआईआर कराने का दावा किया गया था। लेकिन एफआईआर नहीं कराई गई। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इसमें तत्कालीन विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। इसलिए विभाग सीधे तौर पर कार्रवाई करने से बच रहा है। मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन फर्जीवाड़ा करने वाले के नाम न तो सार्वजनिक किए गए और न ही उनके खिलाफ एफआईआर कराई गई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शरद कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी ओर से जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। आरोपियों के खिलाफ शासन स्तर से ही कार्रवाई कराई जाएगी।

- दोबारा जांच में खुला था घोटाला
इस मामले की जांच 2012 में की गई थी, लेकिन तब तत्कालीन जांच अधिकारी ने मदरसे को क्लीन चिट दे दी थी। उसके बाद से फर्जीवाड़ा जारी रहा। एक माह पूर्व इस मामले की दोबारा जांच करने 58 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था।
विज्ञापन


- खंगाले गए खाते
जिन खातों के जरिए 58 लाख रुपये की बंदरबांट हुई है, उन खातों को जिला अल्पसंख्यक विभाग ने खंगाला है। छात्रवृत्ति के नाम पर यह मोटी रकम हड़पी गई। सूत्र बताते हैं कि यह घोटाला 58 लाख रुपये अधिक है। करीब 200 खातों के जरिए छात्रवृत्ति प्राप्त की गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें