जांच में लापरवाही से बने फर्जी पासपोर्ट
सहारनपुर। देवबंद में एटीएस की कार्रवाई से फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का खुलासा हो चुका है। इस मामले में पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों की छानबीन में स्थानीय अफसरों की लापरवाही भी बड़ी जिम्मेदार रही। यदि पहचान से जरूरी आधार, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य दस्तावेजों का सही सत्यापन होता तो यह खेल बहुत पहले ही सामने आ सकता था। इस मामले में अफसरों से लेकर कर्मचारी तक मौन हैं।
बता दें कि एक सप्ताह में यूपी एटीएस फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में देवबंद में पासपोर्ट बनाने वाले लोगों के ठिकानों पर दो बार छापे मार चुकी है। एटीएस छह लोगों को गिरफ्तार कर चुुकी है। शनिवार की रात भी कार्रवाई करते हुए एटीएस ने देवबंद में चार लोगों से पूछताछ की। एटीएस ने आरोपियों के पास से तमाम वह दस्तावेज बरामद किए। इनका इस्तेमाल फर्जी पासपोर्ट बनाने में किया जा रहा था।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि एटीएस ने फर्जी मोहर, आधार कार्ड, पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस आदि सहित तमाम फर्जी दस्तावेज बरामद किए। इन दस्तावेजों को पासपोर्ट बनाने में प्रयोग किया और स्थानीय खुफिया विभाग तथा पुलिस-प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। इन दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए और सरकारी तंत्र की जांच में इन दस्तावेजों को सही बताया गया। इससे साफ है कि जांच में पुलिस-प्रशासन ने लापरवाही बरती है। तभी फर्जी पासपोर्ट तैयार किए गए। एटीएस की कार्रवाई में यह खुलासा हो चुका है। इस मामले में एटीएस अभी कई अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर सकती है। लेकिन फर्जी पासपोर्ट के मामले में स्थानीय पुलिस-प्रशासन कार्रवाई नहीं कर सका। उधर, मामले में अधिकारी भी बोलने को तैयार नहीं है।
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फर्जी दस्तावेेेजों पर पाक नागरिक ने प्राप्त की थी भारतीय नागरिकता
सहारनपुर। फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने वाले लोगों को पकड़ने में जनपद पुलिस हमेशा नाकाम रही है। 2008 में पंजाब की पटियाला पुलिस ने कोतवाली सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला हकीकतनगर में छापा मारकर पाक नागरिक इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल को गिरफ्तार किया था। वह यहां किराए के मकान में नाम बदलकर रह रहा था। उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर ली थी। तब सरकारी तंत्र की काफी किरकिरी हुई थी। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधयों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिन्होंने इकबाल भट्टी के दस्तावेज तैयार कराने में मदद की थी। कोर्ट सभी मामलों में इकबाल भट्टी को सजा चुकी है। स्थानीय पुलिस को इस मामले की भनक तक नहीं लग सकी थी।