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युवती का अपहरण व गैर इरादतन हत्या के मामले में एक आरोपी को पांच वर्ष की सजा

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देवबंद (सहारनपुर) युवती का अपहरण करने तथा गैर इरादतन हत्या के तीन वर्ष पुराने मामले में अदालत ने दोषी को पांच वर्ष के कठोर कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा आरोपी को कई अन्य धाराओं में भी सजा भुगतनी होगी। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पालम राणा ने बताया कि 3 जून 2014 को भलसवईसपुर निवासी आत्माराम बेटी संगीता के साथ नागल के कोटा गांव स्थित बैंक में जा रहा था। इस दौरान पीछे से आई बोलेरो कार में सवार कोटा गांव निवासी जोनी ने अपने तीन साथियों के साथ आत्माराम को रोक लिया तथा उसे धक्का देकर संगीता को कार में डालकर अपहरण करके बलियाखेड़ी रेलवे फाटक की तरफ ले गया। जहां फाटक बंद होने तथा पुलिस के खड़े होने के कारण वह बलियाखेड़ी से कार को सहारनपुर की ओर ले जाने लगा। इसी दौरान बडुली चौराहे के समीप मोड़ पर उसकी कार एक खेत में पलट गई। खेत पर काम कर रहा आत्माराम का भाई श्रवण व अन्य लोग दौड़कर कार के पास पहुंचे तो उक्त लोग वहां से फरार हो गए। जबकि गाड़ी के भीतर संगीता खून से लथपथ पड़ी हुई थी। देखने पर पता चला कि संगीता की मौत हो चुकी है। जिसके बाद पुलिस ने आत्माराम की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 366, 279, 338 व 304 (ए) के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज की थी। बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. राकेश कुमार नैन की अदालत ने जोनी को दोषी मानते हुए धारा 366 में पांच वर्ष के कठोर कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि धारा 279 में तीन माह कारावास 500 रुपये अर्थदंड, धारा 338 में छह माह का कारावास 500 रुपये का अर्थदंड तथा 304 (ए) में दो वर्ष के कारावास व एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अदालत ने कहा कि सभी सजाएं एक साथ चलेगी तथा अभियुक्त जोनी द्वारा इस मामले में जेल में बिताई गई अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी। साथ ही आदेश दिया कि अधिरोपित अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़ित पक्ष को दी जाए।
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