सहारनपुर। शहरी इलाके की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी ठोस अपशिष्ट निवारण को समाप्त करने के लिए इन दिनों शहर के आसपास डंपिंग ग्राउंड की तलाश की जा रही है। डंपिंग ग्राउंड चयन को लेकर हो रही कवायद में नगर निगम के कर्मचारी और अधिकारी बड़े खेल की तैयारी में हैं। यही कारण है कि डेढ़ साल पहले चली इस पूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज कर नए सिरे से जमीन की तलाश की जा रही है। हालांकि पिछले दो साल से ज्यादा समय से चल रही पूरी कवायद में चार से ज्यादा प्रस्ताव नगर निगम को मिल चुका है। मगर, नए सिरे से प्रस्तावों को लेकर अफसरों के बीच रस्साकशी जारी है।
दरअसल, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कलस्टर आधारित परियोजना के प्रोसेसिंग प्लांट लगने हैं। इसके लिए सभी निकायों में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के स्वामित्व की जमीन की तलाश की गई। मगर, आवश्यकतानुसार जमीन नहीं मिलने के चलते नगरायुक्त ने प्रमुख सचिव से इस परियोजना के लिए जमीन खरीदने की स्वीकृति ली। सूत्रों की मानें तो पिछले डेढ़ साल से इस परियोजना में अपनी जमीन खपाने में जुटे सपा नेता को लाभ पहुंचाने के लिए अफसरों के बीच रस्साकशी जारी है। हालांकि नए सिरे से मंगाए गए प्रस्ताव को लेकर एक बार फिर मंथन किया जा रहा है।
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गागलहेड़ी में जमीन पाई गई थी उपयुक्त
मई 2016 में तत्कालीन डीएम ने अपर नगरायुक्त, एसडीएम सदर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर स्वास्थ्य अधिकारी और प्रभारी अधिकारी संपत्ति की पांच सदस्यीय टीम गठित की थी। उस वक्त चार प्रस्तावों में बट्टनवाला गागलहेड़ी, कुम्हारहेड़ा नकुड़, धतौली रांगड़ और मल्हीपुर में जमीनों की जांच की गई थी। इसमें बट्टनवाला की भूमि को सर्वाधिक उपयुक्त मानते हुए प्रथम वरीयता प्रदान की गई थी। इतना ही नहीं, तत्कालीन नगरायुक्त डा. नीरज शुक्ला ने इस परियोजना की डीपीआर बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा। मगर, उस पूरी कवायद को नजरअंदाज कर अब इस परियोजना के लिए नए सिरे से जमीन तलाशी जा रही है।
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इस पूरे मामले नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। डंपिंग ग्राउंड निर्माण में हर पहलू पर विचार विमर्श के बाद ही परियोजना की रुपरेखा तैयार होगी।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त