सहारनपुर। रॉयल पाम और तिरुपति गार्डन का नक्शा निरस्त होने से प्लॉट होल्डर्स टेंशन में आ गए हैं। प्लॉट होल्डर्स को लाखों का नुकसान हो रहा है। प्लॉट की एवज में दिया गया लाखों रुपया पाने के लिए अब वह अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
विकास प्राधिकरण ने रॉयल पाम कॉलोनी का नक्शा पास किया था, जिसके बाद कॉलोनाइजर्स ने प्लॉटों की बिक्री भी शुरू कर दी थी। इसके लिए विकास प्राधिकरण में 17 जून 2015 को प्रवीण गाबा, ललित पोपली, अजय कुमार, कुलदीप कुमार और सुशील गाबा ने तलपट नक्शा प्रस्तुत किया। इनकी ओर से प्राधिकरण कोष में पोस्ट डेटेड चेक जमा किया गया, मगर वह बाउंस हो गया। साथ ही कॉलोनी के स्वामित्व को लेकर सामने आए विवाद के बाद विकास प्राधिकरण के अधिकारी हरकत में आए और मामले की जांच कराई। जांच में यह भी पाया गया कि नक्शे में अंकित नियम और शर्तों का पालन नहीं किया गया। स्वामित्व विवाद उजागर होने के बाद प्राधिकरण की ओर से स्वीकृत नक्शे और पहले से स्वीकृत नक्शे में दिए गए भूमि के खसरों में भिन्नता मिली। तमाम खामियों के बाद प्राधिकरण ने मानचित्र को निरस्त कर दिया है। कॉलोनाइजर्स की हेराफेरी और प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्रवाई से प्लॉट होल्डर्स मुसीबत में आ गए हैं, जिनका लाखों रुपया कॉलोनाइजर्स के पास फंस गया है।
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रॉयल पाम में निवेशकों की भी तलाश
कालोनाइजर सुशील गाबा और उसके पार्टनर ने इस कालोनी को किसी अन्य ग्रुप को दे दिया था। वर्तमान में एक अलग ग्रुप की ओर से प्लाट की बिक्री आदि की जा रही थी। ऐसे में अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि रॉयल पाम के प्लाट होल्डर अपनी धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस को कर सकते हैं। ऐसे में कालोनी में निवेश कर प्लाट की बिक्री करने वाले निवेशकों की भी तलाश की जा रही है।
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प्लॉट होल्डर्स के साथ धोखा कॉलोनाइजर्स ने किया है। ऐसे में प्लॉट होल्डर्स अपने स्तर पर पुलिस में शिकायत करें। यदि उनकी समस्या को दूर करने में प्राधिकरण की जरूरत पड़ेगी तो प्राधिकरण साथ है। मगर कुल मिलाकर पूरी गड़बड़ी कॉलोनाइजर्स ने की है, जिन्होंने प्राधिकरण को भी अंधेरे में रखने की कोशिश की।
मनोज कुमार, उपाध्यक्ष, एसडीए।