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दूध व्यवसायी राकेश अरोड़ा हत्याकांड बन गया पुलिस के लिए पहेली

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सहारनपुर। सात माह हो गए राकेश अरोड़ा की हत्या हुए, लेकिन हत्यारे इतने शातिर निकले कि पुलिस इस हत्याकांड में पूरी तरह से उलझ कर रह गई है। इस बीच तीन एसएसपी और तीन थानेदार बदल गए, लेकिन जांच जहां से शुरू हुई थी अभी तक वहीं अटकी हुई है।
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सहारनपुर के दूूध व्यवसायी राकेश अरोड़ा को 30 जनवरी की शाम को रामपुर मनिहारान स्थित अपने प्लांट से लौटते समय रास्ते से अगवा कर उनकी कार में ही हत्या कर दी गई। उनकी कार एक बाग में खड़ी मिली थी और कार में ही उनका शव पड़ा हुआ मिला। पुलिस ने उस समय तो सात दिन में ही इस हत्याकांड का खुलासा करने का दावा किया था, लेकिन जांच को धीरे-धीरे सात माह हो गए। जांच कहीं पहुंच पाती तो भी ठीक था, लेकिन जांच जहां से शुरू हुई थी, वहीं पर लटकी रही। हत्यारे पुलिस से कई कदम आगे निकले। एक भी ऐसा सबूत नहीं छोड़ा जिससे हत्यारों तक पहुंचना तो दूर हत्या के कारणों तक भी पुलिस नहीं पहुंच सकी। यह हत्याकांड पुलिस के लिए अबूझ पहेली बन गया है। इस हत्याकांड का खुलासा न कर पाने के चलते पहले रामपुर मनिहारान के थाना प्रभारी पीके सिंह को हटाया गया। उनको हटाने के बाद वेद प्रकाश गिरि को भेजा गया। वह भी माथापच्ची कर थक गए तो फिर विशेष रूप से सीपी कठेरिया को भेजा गया, लेकिन कई माह के बाद भी पुलिस एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी। इस जांच में ही तीन एसएसपी भी बदल चुके हैं। लेकिन नतीजा सिफर ही है। हर बार नए सिरे से जांच शुरू की गई। दर्जनों लोगों को बुलाकर पूछताछ की गई। इस बार भी नए सिरे से जांच की गई। लेकिन पुलिस के हाथ नहीं लगा। पुलिस के हाथ अभी तक कोई कहानी नहीं लग सकी है। पुलिस अब राकेश अरोड़ा के नजदीकियों को लेकर गंभीरता दिखा रही है। राकेश अरोड़ा के पुराने मामलों को खोज रही है।
कहां गया दिग्विजय राणा और एसका मुंशी
सहारनपुर। रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए एडवोकेट दिग्विजय राणा और उसके मुंशी विकास का पुलिस अब तक कोई पता नहीं लगा सकी है। सदर कोतवाली पुलिस ने दोनों की हत्या के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया। लेकिन पुलिस की कहानी पर अभी तक किसी को कोई विश्वास नहीं है। एक माह से अधिक समय बीत चुका है, न तो आज तक दिग्विजय राणा की हत्या का कोई सुबूत ही मिल पाया और न ही वह बाइक ही अभी तक बरामद हो सकी, जिस पर दिग्विजय राणा और मुंशी रुड़की के लिए गए थे। सदर कोतवाली पुलिस ने लोगों को शांत करने के लिए कहानी बुन डाली। परिजनों को भी संतुष्ट नहीं कर सके। पुलिस ने कह दिया कि हत्यारों ने दोनों को नहर में डुबो कर हत्या कर दी। इस कहानी को लेकर रुड़की से लेकर गाजियाबाद तक नहर में जाल डलवा दिया गया। लेकिन जाल में न तो दिग्विजय का शव मिला और न ही मुंशी का। जिससे सदर कोतवाली पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही है। परिजनों को पुलिस कोई जवाब भी नहीं दे पा रही है।
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जल्दी हो जाएगा घटनाओं का पर्दाफाश
एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि राकेश अरोड़ा हत्याकांड में नए सिरे से जांच की जा रही है। कुछ नए लोगों से पूछताछ की जा रही है। जिनसे कुछ सबूत भी मिल रहे हैं। इससे खुलासे की उम्मीद जगी है। पुलिस टीमें इस पर विशेष रूप से कार्य कर रहीं हैं। दिग्विजय राणा हत्याकांड में शव तो बरामद नहीं हो सके हैं। बाइक को बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।
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