सहारनपुर। करीब दो साल पहले आतंक का पर्याय बन चुके राहुल खट्टा और उसके साथी की घेराबंदी कर सहारनपुर पुुलिस ने दोनों को ढेर कर दिया था। इस दौरान दो बदमाश जिंदा पकड़े गए थे। इसके बाद सहारनपुर में बदमाशों की आमद मानो थम सी गई थी। पुलिस एक-एक करके बदमाशों को निशाना बनाया और उन्हें जेल के पीछे पहुंचाया। आलम यह रहा कि सहारनपुर पुलिस का इकबाल बुलंद हुआ और यहां कानून व्यवस्था दुरुस्त रही। हालांकि कुछ महीने बाद फिर बदमाशों का आतंक यहां हो गया था। एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ में बदमाश ढेर हुआ तो जाहिर है कि पुलिस के हौसले बुलंद हुए हैं।
देवबंद जेल में बंद शमशाद पेशी के दौरान भाग गया तो पूरे महकमे पर उंगली उठनी लाजिमी थी। मगर, सहारनपुर पुलिस ने एकजुटता का परिचय दिखाया और सटीक सूचना पर घेराबंदी की। पुलिस के बीच ऐसा सामंजस्य बहुत कम देखने को मिलता है। जून 2015 में ऐसे ही एसएसपी नितिन तिवारी के नेतृत्व में पुलिस ने राहुल खट्टा को ढेर किया था। उस वक्त शामली पुलिस ने खट्टा और उसके साथियों की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद सहारनपुर पुलिस ने कई थानों की फोर्स के साथ घेराबंदी कर उसे मार गिराया था। इसके बाद आरपी सिंह यादव, प्रदीप यादव, मनोज तिवारी सहित कई कप्तान यहां तैनात रहे, मगर वे पुलिस बल को एकजुट करने में बहुत कामयाब नहीं हुए। बदले माहौल में एसएसपी बबलू कुमार ने जरूर पुलिस के इकबाल को बुलंद करने की कोशिश की है। यही कारण है कि इनामी बदमाशों के धरकपड़ अभियान में बदमाशों की गोली से भागने की बजाय पुलिसकर्मियों ने उसका मुकाबला किया। एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि निश्चित ही ऐसी कार्रवाई से जनता के बीच भरोसा बनता है और अपराधियों के बीच दहशत होती है। पुलिस का मनोबल बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।