सहारनपुर। माटी की सुगंध समूह द्वारा साहित्य मनीषी श्यामनंद सरस्वती के जन्मदिवस पर सरस कवि सम्मेलन का ऑनलाइन आयोजन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय गीतकार डॉ. सिंह आर्य ने अपनी प्रस्तुति देते कहा कि दर्द का गीत मुझे गाने दे, पतझड़ों में बहार आने दे, मेरे घावों पर पे मत लगा मरहम, मेरे घावों को मुस्कराने दे। इसी तरह मुरादाबाद से मुख्य अतिथि गजलकार डॉ कृष्ण कुमार नाज ने शेर सुनाते हुए कहा कि जिंदगी की कश्मकश ने सोख ली सारी मिठास, मैं समंदर मगर, बेइंतहा खारा हूं मैं। विशिष्टि अतिथि गीतकार विनोद भृंग ने कहा कि शीत लहर जब-जब चले, उड़-उड़ जाए होश, टुकड़ा हल्की धूप का, तन में भरता जोश। दिल्ली के कवि हरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि मैं हरम में नहीं जाता हूं सजदा करने, फिर भी दीदार में तो रोज है आता कोई। करनाल से कार्यक्रम संयोजक भारत भूषण वर्मा ने कोरोना वैक्सीन आने की खुशी इजहार करते हुए कहा कि कोरोना के नाश का टीका है तैयार, भारत सरकार को वंदन बारंबार। कार्यक्रम का संचालन कर रही राजस्थान के अलवर से डॉ. सीमा विजयवर्गीय ने कहा कि प्रेम पूजा है सुन, प्रेम है कहानी हमारी गजलों में। जल संरक्षण का संदेश देते हुए रुड़की से शायर पंकज त्यागी ने कहा कि ऐ लोगों, इल्तिजा मेरी, नहीं तो खत्म होगा जहां से पानी।