सहारनपुर। प्रदेश सरकार ने धार्मिक महत्व वाले शहरों का कायाकल्प करने की घोषणा की है। खुशी की बात यह है कि पश्चिम यूपी में सिर्फ सहारनपुर जिले को इस सूची में शामिल किया गया है। वैसे तो मां शाकंभरी देवी सिद्धपीठ की वजह से सहारनपुर का नाम दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। जिले में कुछ और ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनकी अपनी मान्यता है और बड़ी तादाद में वहां पर श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं, लेकिन कायाकल्प न होने से अपनी वह पहचान नहीं बना सके, जिसके वह हकदार है। प्रदेश सरकार अगर इन धार्मिक स्थलों का सुंदरीकरण कराएं तो जिले को अलग ही पहचान मिलेगी।
देवबंद : त्रिपुर मां बाला सुंदरी
देवबंद में शक्तिपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर है। भवन के अंदर श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी पिंडी रूप में विराजमान हैं। महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान कुरुक्षेत्र जाने से पूर्व कुछ समय यहां पर व्यतीत किया था। धनुर्धर अर्जुन ने मां जगदंबा और युधिष्ठर ने ग्यारहमुखी महादेव की आराधना की थी। मान्यता है कि चैत्र मास की चतुर्दशी तिथि को आयोजित होने वाले मेले से पूर्व तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी भी होती है।
देवबंद : सिद्धपीठ श्री मन्केश्वर महादेव मंदिर
देवबंद का सिद्धपीठ श्री मन्केश्वर महादेव मंदिर मानकी स्वयं में इतिहास समेटे हुए है। मंदिर में प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शिवलिंग के दर्शन करने आते हैं। मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना होने के साथ ही वह अपने अंदर विभिन्न प्रकार की चमत्कारिक घटनाओं को समेटे है।
सरसावा : बनखंडी महादेव मंदिर
सरसावा में नकुड़ रोड पर बनखंडी महादेव मंदिर को महाभारत कालीन माना जाता है। माना जाता है कि यहां पर पांडव पुत्र सहदेव ने भी पूजा की थी। जिस स्थान पर बनखंडी महादेव का मंदिर है, वहां पर कभी सिरस के पेड़ों का घना जंगल हुआ करता था, जिसके बीच में ये शिवलिंग मौजूद था। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
नानौता : बरसी महादेव मंदिर
नानौता से करीब सात किलोमीटर दूर बरसी गांव में महाभारत कालीन शिव मंदिर है। इस मंदिर के निर्माण के बारे में किवदंती है कि इसका निर्माण अज्ञातवास के दौरान पांडव पुत्र भीम ने किया था। इस मंदिर का मुख्य द्वार भीम ने पश्चिम दिशा में कर दिया था। मन्नत पूरी होने पर गुड़ की भेली और कद्दू का प्रसाद चढ़ाते हैं।
सरसावा में नकुड़ रोड पर वनखंडी महादेव मंदिर।