सहारनपुर। इंद्रदेव इस बार पहाड़ी इलाकों पर ही मेहरबान हैं, मैदानी इलाकों से वे मानो रुठे हुए हैं। जनपद में बीते वर्षों की तुलना में इस बार अभी तक काफी अच्छी बारिश हुई है, लेकिन प्लेन के लोग अच्छी बारिश को तरस रहे हैं। उमस भरे मौसम में लोगों का जीना मुहाल हो गया है। 15 जून से 15 जुलाई तक अभी तक कम और अधिक मिलाकर 18 बार बारिश हुई है, जिनमें 309.5 मिलीलीटर मापा गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 जून के बाद मानसून का आना माना जाता है, लेकिन सहारनपुर शहर के साथ ही जनपद के पूरब यानी देवबंद क्षेत्र, पश्चिम यानी नकुड़, सरसावा क्षेत्र और दक्षिण यानी रामपुर मनिहारान, गंगोह, नानौता क्षेत्र में इस बार लोग अच्छी बारिश के लिए अभी तक तरस रहे हैं। वहीं पहाड़ों वाले शिवालिक क्षेत्र के बेहट, शाकंभरी, मुजफ्फराबाद, मिर्जापुर, सुंदरपुर, बिहारीगढ़ में झमाझम बारिश हो रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी तक 18 बार बारिश हो चुकी हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में केवल दो दिन आधा से एक घंटे की झमाझम बारिश रही है। बाकी दिनों में केवल बूंदाबांदी हो रही है, जिससे उमस और बढ़ रही है, साथ ही तापमान भी बार बार घट और बढ़ रहा है। जिसकी वजह से लोग परेशान हैं। बीते पांच साल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2018 में 302 मिलीलीटर बारिश 15 जुलाई तक हो चुकी थी। उसके बाद लगातार बारिश कम हुई है।
बीते पांच साल का आंकड़ा
15 जून से 15 जुलाई-------बारिश मिलीमीटर
2018-------------------302 एमएम
2019-------------------215 एमएम
2020-------------------136 एमएम
2021-------------------121 एमएम
2022-------------------309.5 एमएम
दस दिन का तापमान
तिथि---------न्यूनतम-----अधिकतम
16 जुलाई----27.5------37
15 जुलाई----25.2------37
14 जुलाई----28.5------36
13 जुलाई----27.5------34.5
12 जुलाई----28.5------32
11 जुलाई----27.5------33
10 जुलाई----14-------30.5
09 जुलाई----26.5------30
08 जुलाई----29.5------36
07 जुलाई----26--------34
बारिश नहीं होने से पिछड़ी धान की रोपाई
सहारनपुर। अच्छी बारिश नहीं होने से न सिर्फ धान की रोपाई पिछड गई है, बल्कि महंगी भी हो गई है। जनपद में धान की खेती का लक्ष्य 60 हजार हेक्टेयर का है। इसमें से अब तक 50 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो पाई है। बारिश नहीं होने के कारण जनरेटर, इंजन, ट्रैक्टर आदि का सहारा लेकर धान की रोपाई करने वाले किसानों की खेती की लागत बढ़ गई है। अब उनके सामने धान सहित अन्य फसलों को बचाने के लिए सिंचाई करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
जनपद में गत वर्ष 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई थी। शासन ने इस बार भी इतना ही लक्ष्य जनपद को दिया है। जिले में सबसे अधिक सुगंधित धान (बासमती की प्रजातियां) की खेती होती है। बासमती धान का रकबा करीब 45 हजार हेक्टेयर है। इसके अलावा कॉमन धान आठ और अन्य हाइब्रिड प्रजातियों का धान सात हजार हेक्टेयर में लगता है। बारिश नहीं होने से किसानों को धान की रोपाई से लेकर सिंचाई के लिए जेनरेटर, ट्रैक्टर, इंजन आदि का सहारा लेना पड़ रहा है। जिससे धान सहित अन्य खेती महंगी हो रही है। जिला कृषि अधिकारी धीरज कुमार सिंह ने बताया कि इस सीजन में धान की खेती का लक्ष्य 60 हजार हेक्टेयर है। अब तक 50 प्रतिशत क्षेत्रफल में धान की रोपाई हो चकी है। बारिश नहीं होने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।
घटा दी धान की खेती
नागल के किसान प्रवीण कुमार ने बताया कि वे प्रत्येक वर्ष करीब 25 बीघा धान की खेती करते हैं। इस बार बारिश नहीं होने के चलते उन्हें मात्र चार बीघा ही धान लगाया है। बारिश नहीं होने से धान की खेती काफी महंगी हो जाएगी। क्योंकि धान की फसल को पानी का काफी आवश्यकता होती है।
घाटे का सौदा हो जाएगी धान की खेती
बड़गांव के किसान शिव कुमार सिंह का कहना है कि इस बार बारिश नहीं होने के चलते किसान परेशान हैं। क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति भी मात्र तीन से चार घंटे ही हो रही है। पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ती है। प्रतिदिन की सिंचाई में ही करीब तीन हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
फसल बचाना हो रहा मुश्किल
गांव टोडरपुर के चौधरी ताहिर का कहना है कि उन्होंने इस बार 40 बीघा धान की फसल लगायी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। यही स्थिति रही तो धान की खेती न सिर्फ लागत बढे़गी बल्कि पैदावार में भी कमी आएगी।