चंदेना कोली गांव में दीपावली पर्व के लिए स्पेशल पेड़ा तैयार करते दुकानदार। -संवाद
देवबंद/तलहेडी बुजुर्ग। आगरा के पेठा की तरह चंदेना कोली गांव में बनाए जाने वाला स्पेशल पेड़ा अपनी खूबियों के कारण दूर-दूर तक मशहूर है। भारत के कई राज्यों के अलावा विदेशों में भी चंदेना का पेड़ा लोगों के मुंह में मिठास घोल रहा है।
यूं तो रोजाना ही भारी मात्रा में पेड़े की बिक्री होती है। लेकिन दीपावली, होली समेत अन्य त्योहारों पर पेड़े की मांग अधिक बढ़ जाती है। ग्रामीणों की माने तो चंदेना कोली में बल्लू पंडित ने लगभग 80 वर्ष पहले पेड़ा बनाने का व्यवसाय शुरू किया था, लेकिन आज दो दर्जन से अधिक दुकानों पर पेड़ा तैयार होकर बाहर बिक्री के लिए भेजा जाता है। इस व्यवसाय से जुड़े लोग अच्छा खासा मुनाफा भी कमा रहे हैं।
दुकानदार राजकरण ने बताया कि उन्होंने बल्लू पंडित से कई वर्ष पेड़ा बनाने की शिक्षा ग्रहण कर सन 1986 में अपनी दुकान शुरू की थी। तब से लेकर आज तक लगातार पेड़े बना रहे हैं। हर रोज लगभग 40 से 50 किलो पेड़ा बिक्री किया जाता है। इसके लिए वह दूध भी पशुपालकों के यहां से खुद लाते हैं, साथ ही इस पेड़े में बूरा (मिठाई) भी अलग प्रकार का इस्तेमाल किया जाता है जो कि ऑर्डर देकर तैयार कराया जाता है। त्योहारों के अवसर पर पेड़ों की मांग ज्यादा बढ़ जाती है। राजकरण ने बताया कि गांव के कई लोग जो सऊदी अरब, अमेरिका आदि देशों में रहकर नौकरी करते हैं, वह यहां से पेड़ा लेकर जाते हैं। जिन्हें वहां के लोगों द्वारा भी काफी पसंद किया जाता है।