सराफ कारोबारी सौरभ बब्बर और उनकी पत्नी मोना बब्बर के हरिद्वार जाकर गंगा में कूदने की घटना से हर कोई स्तब्ध है। सौरभ का शव तो मिल गया, लेकिन मोना का कुछ अता पता नहीं है। सौरभ के दो बच्चे हैं। बेटा संयम और बेटी श्रद्धा। मंगलवार को खेमका सदन में शोकसभा हुई। इसमें हर किसी की आंखें नम हो गईं। पिता दर्शनलाल बब्बर बेटे के जाने के बाद से गम में हैं। बार-बार बेटे को याद कर भावुक हो जा रहे हैं। वहीं सौरभ का सात वर्षीय बेटा संयम भी बार-बार पूछ रहा था कि पापा कब आएंगे। वह दिव्यांग है, जल्दी ही उसके पैर का ऑपरेशन भी होना था।
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सौरभ को श्रद्धांजलि देते पूर्व सांसद फजलुर्रहमान।
- फोटो : अमर उजाला
10 अगस्त को होना था ड्रॉ, कर्जदार रुपये मांगेंगे, इसलिए लगाया मौत को गले
सराफा कारोबारी सौरभ बब्बर धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था। वह हर मंगलवार को भंडारा लगाता था। यहां तक कि कई गरीब बेटियों की शादी में भी मदद की थी, लेकिन कर्जदारों के दबाव में आकर दंपती ऐसा कदम उठा लेगा, यह कोई नहीं जानता था।
10 अगस्त को भी गोल्ड किटी सेविंग का ड्रॉ होना था। इसके लिए निर्धारित समय पर गोल्ड किटी सेविंग से जुड़े सदस्य आयोजन स्थल पर पहुंच गए थे, लेकिन सौरभ बब्बर नहीं पहुंचे। आशंका है कि ड्रॉ होते ही तुरंत कर्जदार रुपये मांगेंगे, इस दबाव में आकर सौरभ बब्बर ने मौत को गले लगा लिया। सौरभ के पिता दर्शनलाल का कहना है कि जिन-जिन लोगों के दबाव के कारण उनके बेटे ने यह कदम उठाया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। उधर, सौरभ की पत्नी मोना का मंगलवार को भी कोई पता नहीं चल सका। हरिद्वार पुलिस के साथ लगातार उनके परिजन संपर्क में हैं।
सात करोड़ का सोना किया था बुक, परिचित ने दिया धोखा
सहारनपुर में कई सराफा कारोबारी गोल्ड किटी का काम करते हैं। चर्चा है कि सौरभ ने अपने एक परिचित कारोबारी के बेटे के पास करीब सात करोड़ का सोना बुक किया था। उसे रुपये भी दे दिए गए थे, लेकिन कारोबारी का बेटा कुछ समय पहले करोड़ों रुपये लेकर यहां से फरार हो गया था। बताया जा रहा है कि यही सौरभ बब्बर के कर्ज में डूबने का कारण बना। हालांकि परिजनों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
नौकर गोलू को सौंप दी थी दुकान की चाबी
पिता दर्शनलाल ने बताया कि जिस तरीके से हरिद्वार जाने से पहले सौरभ ने अपने सभी काम पूरे किए, उससे लग रहा है कि कई दिनों से उसके मन में कुछ चल रहा था। सौरभ अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ दूसरे मकान में रहता था। नौ अगस्त को भी बेटा-बहू और दोनों बच्चे घर आए थे। वह बस इतना कह रहे थे कि जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा। दुकान की चाबी नौकर गोलू को सौंप दी थी कि सुबह समय से दुकान खोल लेना। इसके बाद दोनों बच्चे संयम और श्रद्धा को उनके नाना-नानी के घर छोड़ा और हरिद्वार के लिए निकल गए। गोलू को पता था कि सौरभ पर काफी कर्ज है। इसलिए वह तनख्वाह भी नहीं लेता था।
तीन जुलाई को मनाया था जन्मदिन
परिजनों के मुताबिक, सौरभ सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। निर्धन कन्याओं का विवाह कराना हो या फिर बेसहारा लोगों की मदद। सौरभ श्री साईं परिवार समिति के मुख्य संरक्षक भी थे। सौरभ बब्बर का जन्मदिन तीन जुलाई को था। उनकी फेसबुक पर अधिकांश पोस्ट साईं बाबा की हैं। अप्रैल में सौरभ व उनकी पत्नी ने पिरान कलियर में मकदूम साहब की मजार पर चादर चढ़ाई थी। वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते थे।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे सांसद इमरान मसूद और अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
सांसद व एमएलसी ने परिवार को बंधाया ढांढ़स
बुधवार को सांसद इमरान मसूद और एमएलसी शाहनवाज खान गोविंद नगर में मृतक सौरभ बब्बर के घर पहुंचे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने परिवार के लोगों का ढांढ़स बंधाया। कहा कि वह हर समय उनके साथ खड़े हैं। इस दौरान इमरान मसूद ने हरिद्वार में संबंधित क्षेत्र के चौकी प्रभारी से बात की और सौरभ की पत्नी के मिलने को लेकर जानकारी ली।
तनाव में हो तो दोस्तों के साथ शेयर करें परेशानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. अंशुमन तिवारी ने बताया कि आत्महत्या करने के कई कारण होते हैं। यदि व्यक्ति तनाव में है तो उसे अपनी परेशानी को बताना चाहिए। अपने दोस्तों के साथ शेयर करें या फिर अपने किसी बड़े-बुजुर्ग से सलाह लें। तनाव में व्यक्ति अकेला रहता है, जिसे कुछ समझ में नहीं आता। मन को शांत रखें और तनाव को दूर करने के लिए चिकित्सक से सलाह लें। आत्महत्या करना समस्या का समाधान नहीं है।