ग्राम बुडाखेड़ा गुर्जर में लगा बरगद
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आजादी के 75 वर्ष देख चुका बुड्ढाखेड़ा गुर्जर का बरगद
सहारनपुर। जनपद के प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी बाबू हरनाथ सिंह द्वारा रोपा गया बरगद आजादी के 75 वर्ष देख चुका है। गांव बुडढाखेड़ा गुर्जर के बस अड्डे पर यह बरगद का पौधा उन्होंने 15 अगस्त 1947 को आजादी के उल्लास में लगाया था। बरगद का यह पेड़ लोगों को आजादी के संघर्ष में स्वतंत्रता सेनानी बाबू हरनाथ सिंह के योगदान की याद दिलाता है।
सहारनपुर-बडगांव मार्ग पर स्थित गांव बुड्ढाखेड़ा गुर्जर में चौधरी धन सिंह के यहां जन्मे बाबू हरनाथ सिंह ने गांधी जी से प्रेरित होकर 1920 के असहयोग आंदोलन में भाग लिया। उस समय बाबू हरनाथ सिंह हरियाणा राज्य के जनपद यमुनानगर स्थित सरस्वती शुगर मिल के गन्ना विभाग में कार्यरत थे। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूर्णरूप से आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। आजादी के संघर्ष दौरान उन्हें गांव बुड्ढाखेड़ा गुर्जर और पहांसू के बीच एक जनसभा करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। इस मामले में ढाई वर्ष की जेल की सजा के साथ ही उन पर 25 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। लेकिन आजादी के इस दीवाने ने जुर्माना अदा करने से साफ इंकार कर दिया। उनका तर्क था कि जब उन्होंने कोई जुर्म ही नहीं किया तो जुर्माना क्यों अदा किया जाए। इस पर उन्हें पांच बेतों की सजा सुनाई गई। आजादी के बाद उन्होंने क्षेत्र में छूआछूत को समाप्त करने का बीड़ा उठाया और सामाजिक समरसता के कई कार्यक्त्रस्म आयोजित किए।
बाबू हरनाथ सिंह के पौत्र चौधरी विनोद कुमार और चौधरी कल्याण सिंह बताते हैं कि स्वतंत्रता सेनानी रहे उनके बाबा ने देश की आजादी वाले दिन 15 अगस्त 1947 को बरगद का जो पौधा रोपा था, वह आज विशाल रूप ले चुका है। यह वटवृक्ष क्षेत्र के लोगों को आजादी के दिन की याद दिलाता है।
स्वतंत्रता सेनी बाबू हरनाथ सिंह- फोटो : SAHARANPUR