जिला अस्पताल पर पर्ची के लिये लगी भीड़
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सहारनपुर। काला मोतियाबिंद मरीजों की आंखों की रोशनी को छीन रहा है। मोतियाबिंद को नजरअंदाज करने वाले लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज और सेठ बलदेव दास बाजोरिया जिला अस्पताल में काला मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसमें पांच से 10 फीसदी मरीज आंखों की रोशनी गंवा देते हैं।
पिलखनी स्थित शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक चलती है। प्रतिदिन की ओपीडी 1500 से 1800 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 40 आंखों के मरीज आते हैं। इनमें काला मोतियाबिंद के मरीज भी शामिल हैं। चार से पांच मरीजों की आंखों का ऑपरेशन रोजाना होता है। एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में सुबह आठ से शुरू होकर दोपहर दो बजे तक मरीज देखे जाते हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ ओपीडी में रोजाना 70 से 75 मरीज आते हैं। यहां पर हर महीने काला मोतियाबिंद के 175 से 200 तक मरीज आते हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रामानंद बताते हैं कि काला मोतियाबिंद बेहद खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी में मरीज लापरवाही बरतने पर पांच से 10 फीसदी अपनी आंखों की रोशनी गंवा देते हैं। काला मोतियाबिंद आंखों की ऐसी बीमारी है जिसका आसानी से पता नहीं चलता है और जब पता चलता है तब बहुत देर हो चुकी होती है। काला मोतियाबिंद से बचाव का सबसे अच्छा और सरल उपाय नियमित रूप से आंखों की जांच करवाते रहना है।
सर्दी में बढ़ जाता है काला मोतियाबिंद
राजकीय मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेश कुमार ने बताया कि काला मोतियाबिंद सर्दी में बढ़ जाता है। इसमें आंखों की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुंचता है। आंखों की नसों पर लगातार दबाव बढ़ता रहेगा तो वह बेकार भी हो सकती हैं।
काला मोतियाबिंद के लक्षण
-आंखों और सिर में तेज दर्द होना
-नजर कमजोर होना या धुंधला दिखाई देना
-आंखें लाल होना।
-रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना।
-जी मचलाना और उल्टी होना
जिला अस्पताल ओपीडी लगी मरीजो की लाइन- फोटो : SAHARANPUR