देवबंद (सहारनपुर)। महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाला दारुल उलूम पहले भी कई बार इसी तरह की चर्चाओं में आ चुका है। मल्टीमीडिया मोबाइल से लेकर छात्रों को बाहर जाकर अंग्रेजी की कोचिंग लेने पर भी पाबंदी लगाई गई थी। जो राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना था। प्रवेश पर प्रतिबंध को लेकर मुस्लिम महिलाओं को स्पष्ट मत है कि ऐसा नहीं होना चाहिए।
दरअसल, देश के कोने-कोने से दीनी तालीम हासिल करने के लिए छात्र दारुल उलूम आते हैं। कुछ साल पहले संस्था में फोटोग्राफी करने को लेकर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद छात्र केवल पढ़ाई पर ध्यान दें यह तर्क देते हुए मल्टीमीडिया मोबाइल के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद जो प्रतिबंध सुर्खियों में रहा है वह था अंग्रेजी भाषा को लेकर। जो राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बना था। संस्था की ओर से सफाई दी गई थी। जिसमें कहा गया था कि वह अंग्रेजी भाषा के विरोधी नहीं, बल्कि छात्र संस्था में दी जाने वाली तालीम पर फोकस कर सकें इसलिए बाहर जाकर किसी भी प्रकार की कोचिंग पर पाबंदी लगाई थी। महिलाओं के प्रवेश को लेकर पहली बार यह पाबंदी लगाई गई है। हाल ही में नेताओं पर भी पाबंदी लगा दी गई थी कि वह चुनाव के दौरान संस्था में न आए।
पुरुष भी बनाते हैं रील, लगे प्रतिबंध
दारुल उलूम में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना बिल्कुल गलत है। यह प्रतिबंध तो पुरुषों भी लागू होता है। पुरुष भी दारुल उलूम में फोटो खींचते व वीडियो भी बनाते हैं। दारुल उलूम प्रबंधन सिर्फ महिलाओं को निशाना बनाता है। नियम सबके लिए बराबर होना चाहिए।
- फरहा फैज, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता निवासी प्रतापनगर
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बाहरी लोगों पर होनी चाहिए रोक
फोटो खींचने और रील बनाने पर प्रतिबंध लगाना सही है, लेकिन महिलाओं के बच्चे दारुल उलूम में पढ़ते हैं वह लाइब्रेरी और विश्व प्रसिद्ध मस्जिद देखने जा सकती हैं। यह उनका मौलिक अधिकार है। बाहरी लोगों का प्रवेश पर रोक लगाना सही है।
- आतिया साबरी, निवासी मोहल्ला आली (तीन तलाक का केस दायर करने वाली पहली महिला)
महिलाओं पर प्रतिबंध गलत फैसला
जिस प्रकार सीरिया, अफगानिस्तान व पाकिस्तान में महिलाओं पर अनेकों प्रतिबंध थोपे जाते है, उसी प्रकार दारुल उलूम का भी यह तुगलकी फरमान हैं। जब मक्का मदीना में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं है तो दारुल उलूम में क्यों है। दारुल उलूम को समझना चाहिए की यह सीरिया या अफगानिस्तान नहीं बल्कि भारत है।
- विकास त्यागी, पूर्व प्रांत संयोजक बजरंग दल
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प्रबंधन का फैसला दुरुस्त
पूर्व में भी मस्जिद रशीदिया में एकांत में जोड़ों के बैठे होने की शिकायतें मिल चुकी हैं। लड़कों के इदारे में लड़कियों और महिलाओं का रील बनाना और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करना गलत है। इससे इदारा बदनाम हो रहा था। प्रबंधन ने जो फैसला दुरुस्त है।
- मौलाना मुफ्ती असद कासमी, मोहतमिम मदरसा जामिया शेखुल हिंद